बलरामपुर। सहालग के चलते जिले में पनीर और खोवा की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे इनके दामों में 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हो गया है। बाजार में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण आम उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं, वहीं मिठाई कारोबार पर भी इसका असर साफ दिख रहा है।
व्यापारियों के मुताबिक, सामान्य दिनों में 260 से 280 रुपये प्रति किलो बिकने वाला पनीर अब 300 से 340 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं शुद्ध खोवा भी महंगा हो गया है, जिससे लड्डू, बर्फी और अन्य मिठाइयों के दाम बढ़ गए हैं। सहालग के कारण ऑर्डर अधिक हैं, लेकिन कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई है।
पनीर और खोवा में मिलावट की आशंका के चलते अब लोग मशरूम को बेहतर विकल्प के रूप में अपनाने लगे हैं। होटल, कैटरिंग और घरों में मशरूम की डिमांड तेजी से बढ़ी है। कारोबारी रामचंद्र का कहना है कि इस बार सहालग में मशरूम की बिक्री में 20-30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
किसानों के लिए बना अवसर
मशरूम की बढ़ती मांग का सीधा फायदा स्थानीय किसानों को मिल रहा है। कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली फसल होने के कारण अब जिले में कई किसान मशरूम उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। रेहरा बाजार क्षेत्र के किसान दीपक का कहना है कि बाजार में मशरूम की मांग बढ़ी है, जिसे उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह समूह की अध्यक्ष नीलम ने भी कहाकि लोगों को पनीर का विकल्प अब मशरूम की सब्जी लग रही है। यह बेहतर अवसर है। डायटीशियन रिंकी सिंह ने कहाकि मशरूम की सब्जी पनीर से ज्यादा बेहतर है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश पांडेय ने बताया कि मिलावटखोरी पर नजर रखी जा रही है। पनीर और खोवा की गुणवत्ता की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके।