बलरामपुर। डीएम ने गत तीन दिसंबर 2022 को संयुक्त जिला अस्पताल में निर्माणाधीन कोविड रिस्पांस भवन की निर्माण सामग्री की जांच का निर्देश दिया था। मगर एक माह बाद भी जांच नहीं कराई गई। जबकि कार्यदायी संस्था ने भवन निर्माण लगभग पूरा करा दिया है। अब अधिकारी पीडब्ल्यूडी पर मामला थोपकर खुद को बचाने में जुटे हैं।
कोरोना से निपटने के लिए प्रत्येक जिला स्तरीय अस्पताल में 94.46 लाख रुपये की लागत से 32 बेड का इमरजेंसी कोविड रिस्पांस वार्ड बनवाया जा रहा है। डीएम डॉ. महेंद्र कुमार ने बीते तीन दिसंबर को संयुक्त जिला चिकित्सालय में निर्माणाधीन कोविड रिस्पांस वार्ड का औचक निरीक्षण किया था।
भवन निर्माण की गुणवत्ता परखने के लिए डीएम ने ईंट, मौरंग आदि निर्माण सामग्री की जांच पीडब्ल्यूडी से कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया था। साथ ही निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित रहे कार्यदायी संस्था के अवर अभियंता पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश भी दिया था, मगर दोनों मामलों में अब तक कोई प्रगति नहीं हुई। जांच हुए बिना ही कार्यदायी संस्था ने भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता आरएस मौर्या का कहना है कि भवन निर्माण में प्रयोग की जा रही ईंट व अन्य निर्माण सामग्री जांच के लिए पीडब्ल्यूडी लैब भेजी गई थी। मगर वहां के अधिकारियों ने बजट न होने की बात कहकर जांच टाल दी थी।
पीडब्ल्यूडी लैब के प्रभारी राकेश मल का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के लिए लैब में कोई निर्माण सामग्री नहीं भेजी गई है। इस संबंध में अभी तक कोई लिखित पत्र भी नहीं मिला है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि डीएम के निर्देश पर निर्माण सामग्री की जांच कराने का निर्देश विभाग के अवर अभियंता को तत्काल दिया गया था। इस संबंध में जेई से जानकारी ली जा रही है। कार्यदायी संस्था के अवर अभियंता पर हुई कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।