बलरामपुर। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोप में सादुल्लाहनगर इलाके के नूर आलम की गिरफ्तारी की खबर से हर कोई हतप्रभ है। नूर आलम दिल्ली में रहकर प्लास्टर ऑफ पेरिस का काम करता था। कुछ माह पहले ही वह गांव लौटा था। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी ने स्थानीय खुफिया इकाइयों की सक्रियता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सादुल्लाहनगर के भेलया मदनपुर गांव निवासी नूर आलम को आतंकवाद निरोधक दस्ते ने बृहस्पतिवार को संवेदनशील सूचनाएं टेलीग्राम के माध्यम से आईएसआई को साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। नूर आलम भेलया मदनपुर गांव के मालीडीह मजरे में रहता है। प्रधान प्रतिनिधि मसीउद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि नूर आलम दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। वह लोगों के घरों में प्लास्टर ऑफ पेरिस का काम करता था। करीब दो-तीन माह पहले ही वह गांव आया था। बताया कि वह दो भाई हैं। पिता सफात अली फूलों की खेती करते हैं।
प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि नूर आलम का कद काफी छोटा है। उसके परिवार की स्थिति ठीक नहीं है। मगर किसी को जरा भी अंदाजा न था कि वह ऐसी कोई करतूत कर सकता है। नूर आलम की गिरफ्तारी से गांव के लोग आश्चर्यचकित हैं।
वहीं, नूर आलम की गिरफ्तारी से स्थानीय खुफिया इकाई व पुलिस की सक्रियता भी सवालों के घेरे में है। मामले में पुलिस के बड़े अधिकारी भी कुछ कहने से बचते नजर आ रहे हैं। एसओ सादुल्लाहनगर मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि इस बारे में अभी ज्यादा जानकारी तो नहीं है लेकिन नूर आलम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने बताया कि हमें ऐसी कोई कार्रवाई की जानकारी नहीं है।
नूर आलम हाईस्कूल पास है। पहले उसे टिकटॉक व इंस्टा पर वीडियो बनाने का शौक था। बताते हैं कि वह तेज दिमाग का है। गांव के लोगों ने बताया कि वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहता था।
नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में इससे पहले भी एटीएस कई कार्रवाई कर चुकी है। वर्ष 2020 में दिल्ली के धौलाकुआं में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार आतंकी अबू युसुफ उर्फ मुस्तकीम उतरौला कोतवाली क्षेत्र के बढ़या भैसाही गांव का निवासी था। एटीएस ने उतरौला में छापा मारा था। इसके बाद एटीएस ने कई कार्रवाई की। बीते वर्ष भी एटीएस ने सादुल्लाहनगर के ही एक व्यक्ति से शक के आधार पर पूछताछ की थी।