बलरामपुर। अधिवक्ता आपदा राहत कोष के करीब आठ लाख रुपये के कथित गबन के मामले में एफआईआर दर्ज होने के दो माह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। विरोध में मुख्यालय के अधिवक्ताओं ने 18 अगस्त को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है।
अधिवक्ता आपदा राहत समिति ने सोमवार को जनपद न्यायाधीश उत्कर्ष चतुर्वेदी को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह, सचिव मुर्तजा हुसैन और उपाध्यक्ष मृगेंद्र उपाध्याय की ओर से भेजे पत्र में कहा गया है कि राहत कोष के पूर्व संयोजक शशांक त्रिपाठी पर पद पर रहते हुए करीब आठ लाख रुपये की धनराशि अनधिकृत लोगों के नाम भुगतान करने का आरोप है। मामले में 12 जून 2026 को कोतवाली नगर में शशांक त्रिपाठी समेत 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
अधिवक्ताओं का कहना है कि एफआईआर के बाद पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई। इससे पुलिस की कार्रवाई को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। समिति अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह ने बताया कि 18 अगस्त को आमसभा बुलाई गई है। इसमें मामले पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।