फोटो-27- कंपोजिट विद्यालय में टेंगनवार में पढ़ाई करते विद्यार्थी। स्रोत विभाग
बलरामपुर। जिले के 1814 परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में निपुण अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। अब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रत्येक बच्चे को उसकी कक्षा के अनुरूप पढ़ने, लिखने और गणना करने में दक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि निपुण अभियान के तहत आयोजित होने वाली कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को और मजबूत करना है। इस बार निपुण भारत मिशन का विस्तार कक्षा 3 से 5 तक किया जा रहा है। साथ ही बालवाटिका के प्रभावी संचालन पर भी विशेष फोकस रहेगा, जिससे बच्चों की शुरुआती शिक्षा की नींव मजबूत हो सके।
उन्होंने बताया कि कार्यशालाओं में बीईओ, डायट प्राचार्य, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और जिला समन्वयक शिक्षकों को लक्ष्य आधारित शिक्षण, निपुण विद्यालय के मानक, निपुण 2.0, डेटा आधारित अनुश्रवण, कैच-अप शिक्षण और 10 पॉइंट टीचिंग टूलकिट के बारे में प्रशिक्षण देंगे।
इसके अलावा कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक संदर्शिका आधारित संरचित शिक्षण पद्धति को प्रभावी रूप से लागू करने की रणनीति भी तैयार की जाएगी। विभाग की ओर से सीखने के स्तर की नियमित समीक्षा की जाएगी और कमजोर बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक योजनाएं संचालित की जाएंगी।
बीएसए ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी कक्षा के अनुरूप सीखने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि शिक्षक, अभिभावक और विद्यालय सामूहिक प्रयास से इस अभियान को सफल बनाते हैं तो जिले के करीब दो लाख बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत होगी और वे आगे की पढ़ाई के लिए आत्मविश्वास के साथ तैयार हो सकेंगे।