बलरामपुर। जिले की उच्च शिशु मृत्यु दर नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य महकमा विशेष तैयारी में है। जल्द ही जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीदत्तगंज, शिवपुरा व गैसड़ी में भी न्यू बॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) का संचालन शुरू हो जाएगा। ताकि सुदूर गांवों अथवा स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर जन्मे गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों का त्वरित उपचार कर उनकी जान बचाई जा सके।
इसके लिए शासन ने जिले में 55 स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी है। उनके कार्यभार ग्रहण करते ही समय से पहले जन्मे (प्री-मेच्योर) बच्चों, सांस लेने में परेशानी व कम वजन वाले नवजातों को आठ ब्लॉकों में ही इलाज मिलने लगेगा। इससे जिले की शिशु मृत्युदर में भी कमी आएगी।
जिला स्तरीय अस्पताल व सात सीएचसी में एनबीएसयू का संचालन किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर चार रेडिएंट वार्मर व दो फोटो थेरेपी मरीज के साथ सेक्शन करने के उपकरण एवं इमरजेंसी दवाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे जन्म से 42 दिन तक के बीमार बच्चों को तत्काल प्राथमिक इलाज मिल सकेगा। जबकि संयुक्त जिला चिकित्सालय के साथ ही उतरौला, सादुल्लाहनगर, पचपेड़वा व तुलसीपुर सीएचसी में एनबीएसयू पहले से संचालित है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि 55 के सापेक्ष अबतक 44 स्वास्थ्य कर्मचारी कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। तीन नए सीएचसी पर भी एनबीएसयू शुरू करा दिया जाएगा। वर्ष 2012-13 की जनगणना के अनुसार बलरामपुर में शिशु मृत्युदर का आंकड़ा प्रति एक हजार पर 60 है। हमारा प्रयास है कि शिशु मृत्युदर पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।