पचपेड़वा (बलरामपुर)। गौरा चौराहा के झाउवआ गांव की पुष्पा देवी का विश्वास अटल रहा। उसके भरोसे की जीत हुई। चिकित्सक की बात पर परिजन भरोसा कर लिए थे, लेकिन एक मां की ममता को खुद पर ही विश्वास रहा। पूरे एक महीने वह अपने बच्चे के लिए तड़पती रही और बेटे के जिंदा होने की जिद करती रही।
उसके पति जयजय राम कहते हैं कि कई दिनों तक सदमें में ऐसी बातें कह रही है, यह मानकर वह शांत कराते रहे। लेकिन वह बच्चे की तलाश कराने के लिए रोज जिद करती।
पत्नी को परेशान देखकर थाने ले गया कि चलो तहरीर दे देंगे तो मान जाएगी। उसे यह अंदाजा नहीं था कि डाक्टर भी ऐसा कर सकते हैं।
पुलिस ने भी पहले समझाया लेकिन मां की जिद के आगे जांच करने का मन बनाया। प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह कहते हैं कि पहले उन्होंने सोचा कि मां होने के कारण यह बेटे की मौत को सही नहीं मान रही है, लेकिन उसकी आंखों में विश्वास देखकर कार्रवाई शुरू की।
बेटे को पाकर गदगद हुई मां पुष्पा ने गोद में छुपा लिया। कहा कि उसे विश्वास था कि उसके लाल को कुछ नहीं हुआ है। बेटा मिला तो मानो पूरा जहान मिल गया, वह सभी से हाथ जोड़कर धन्यवाद करते दिखी।
नवजात की खरीद करने में बढ़नी के सभासद निसार अभी पकड़ से दूर है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार किए गए चिकित्सकों का कहना है कि निसार बेऔलाद था, इसलिए उसे बिना पैसे लिए ही नवजात दे दिया था।
लेकिन यह बात सच है या नहीं, इस राज से पर्दा निसार की गिरफ्तारी से ही उठ सकेगा। यही नहीं इसके पूर्व बच्चा बेचे जाने का कोई मामला सामने न आने से भी तस्करी के मामले की पुष्टि नहीं हो रही है। फिलहाल पुलिस अभी सारे पहलुओं पर जांच कर रही है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. मुकेश रस्तोगी ने बताया कि पचपेड़वा के मिशन हास्पिटल में बच्चे को बेचने का मामला सामने आया है। मामला गंभीर है, पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। ऐसे नर्सिंग होम चिन्हित किए जाएंगे और उनके विरूद्व कार्रवाई होगी।