अधिकारियों का मानना है कि यह पैसा विदेशी फंडिंग नेटवर्क के जरिये आया है, जिसका इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के बलरामपुर समेत अन्य स्थानों पर बड़े पैमाने पर संपत्ति खरीदने व धर्मांतरण में किया गया। सूत्रों ने बताया कि ईडी छांगुर के अन्य बैंक खातों, संपत्ति और आयकर रिटर्न के बारे में जानकारी जुटा रहा है। छांगुर से जुड़े बैंक खातों में गैर सरकारी संगठन, ट्रस्ट और निजी खाते हैं। ईडी इन खातों से जुड़े लोगों व संस्थाओं को पूछताछ के लिए बुला सकता है। छांगुर ने गिरोह को कानूनी रूप देने के लिए चार अलग संस्थाएं बना रखी थीं।
579 जिलों में जुटे थे छांगुर के 3000 गुर्गे
छांगुर ने देश के 579 जिलों की पहचान कराई थी, जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं। इन जिलों में हिंदू युवतियों को मुस्लिम बनाने के लिए मुहिम चलाने का तानाबाना बुना था। इसके लिए छांगुर ने तीन हजार से अधिक युवाओं को बतौर अनुयायी मैदान में उतारा था।
बेटे को दुनिया में सबसे अमीर बनाना चाहता था छांगुर
छांगुर अपने बेटे महबूब को दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनाने का ख्वाब देख रहा था। धर्मांतरण से कमाई करने के साथ ही वह प्रापर्टी व अन्य कार्य करने की जमीन तैयार रहा था। वह बेटे को अरबपति बनाने के साथ ही टीम का मुखिया बनाना चाहता था।
छांगुर के तीन सहयोगी रडार पर
छांगुर की गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई में तेजी आई है। एटीएस ने छांगुर के खास सिपहसालारों के बारे में भी पड़ताल शुरू कर दी है। कस्बे के साथ ही मधपुर व रेहरा माफी गांव के लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है। पता चला कि आजमगढ़ में छांगुर के इशारे पर धर्मांतरण कराने वाले दो सिपहसालार क्षेत्र में ही मौजूद हैं। छांगुर के लिए अभी भी दोनों लोग सक्रिय हैं और मामले में हो रही कार्रवाई की जानकारी कर रहे हैं। साथ ही मधपुर का ही एक शागिर्द भी गुपचुप तरीके से पुलिस व एटीएस की कार्रवाई पर नजर रख रहा है।
1000 मुस्लिम युवकों की फौज तैयार की
जांच में पता चला है कि छांगुर ने लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने के लिए 1,000 मुस्लिम युवकों की फौज तैयार की थी। उसका जाल महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। उसे विदेश से अकूत धन मिलता था, जिसके जरिये वह अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देता था। हिंदुओं लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने के लिए वह मुस्लिम युवकों को पैसे देता था। नेपाल सीमा से सटे सात जिलों को टारगेट किया गया था।