रेहराबाजार। शादी-विवाह की सहालग शुरू होते ही क्षेत्र में फूलों का कारोबार बढ़ गया है। खासकर गेंदा के फूल की मांग में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे कीमतों में लगभग 15 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले 2000 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला गेंदा का फूल अब 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। बढ़ती मांग का सीधा लाभ स्थानीय फूल उत्पादक किसानों को मिल रहा है।
किसान नवनीत ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ में अफ्रीकन गेंदा और जाफरी गेंदा की पीली, लाल व केसरिया प्रजातियों की खेती की है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब दो क्विंटल फूलों की तुड़ाई की जा रही है। तैयार माल अयोध्या, गोंडा और मनकापुर मंडियों में भेजा जा रहा है, जबकि गौराचौकी, सादुल्लाहनगर, रेहराबाजार और मसकनवा के स्थानीय आढ़ती भी सीधे खेत पर पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन अच्छा हुआ है। मांग बढ़ने के कारण भुगतान भी समय पर मिल रहा है, जिससे किसानों को नकद आमदनी का लाभ मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की खेती अपनाने से किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। गेंदा जैसी फसल कम अवधि में तैयार हो जाती है और सहालग व त्योहारों के समय बेहतर दाम दिलाती है। सहालग के सीजन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मांग आधारित खेती अपनाकर किसान अपनी आय को नई ऊंचाई दे सकते हैं। रेहरा बाजार क्षेत्र में खिले गेंदा के फूल न केवल शादी समारोहों की शोभा बढ़ा रहे हैं, बल्कि किसानों के जीवन को भी महका रहे हैं।
खेत से मंडी तक रोजगार
सहालग के दौरान दूल्हा गाड़ी सजाने, विवाह मंडप, जयमाला मंच, स्वागत द्वार और धार्मिक आयोजनों में गेंदा फूल का व्यापक उपयोग होता है। यही कारण है कि थोक और खुदरा दोनों बाजारों में फूलों की खपत तेजी से बढ़ी है। फूल व्यापारी भी मानते हैं कि सहालग का सीजन पूरे कारोबार को नई ऊर्जा देता है। फूलों की तोड़ाई, छंटाई, पैकिंग और ढुलाई में ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। जलेवा देवी, सीता देवी, रामप्रसाद, जगमोहन, संदीप और कल्पनाथ सहित कई मजदूरों को प्रतिदिन 300 से 400 रुपये तक की मजदूरी मिल रही है। इसके अलावा मंडप सजावट, माला निर्माण और वाहन सजावट से जुड़े कारीगरों को भी काम मिल रहा है।