लखनऊ। 18वें ब्रिक्स एकेडमिक फोरम की मेजबानी लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली साबित होगी। फोरम के समापन पर अमर उजाला से खास बातचीत में कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि इस आयोजन के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ते शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझा शोध से लविवि की मेधा को वैश्विक मंच मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के नए अवसर मिलेंगे। अंतरराष्ट्रीय मंच पर लखनऊ विवि की मेधा चमक बिखेरेगी।
कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विकासशील देशों के आपसी सहयोग से शोध के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होंगी। दो दिन चले फोरम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को विभिन्न ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों, नीति विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को सुनने के साथ उनसे सीधे संवाद करने का अवसर मिला। इससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर हो रहे शोध और विकास की दिशा को समझने में मदद मिली है। विद्यार्थियों के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी है।
एमओयू और नॉलेज शेयरिंग से बढ़ेंगे अवसर
प्रो. सैनी ने कहा कि फोरम के बाद अलग-अलग देशों के विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच एमओयू की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इनके जरिये नॉलेज शेयरिंग, संयुक्त शोध परियोजनाओं और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। विभिन्न देशों के विद्यार्थी एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर वहां की परिस्थितियों और चुनौतियों को करीब से समझ सकेंगे। इससे ऐसी कोलेबोरेटिव रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा लाभ समाज को मिल सके।
वैश्विक संवाद से स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
कुलपति ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से मजबूती मिलेगी। लविवि में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों का जुटना प्रदेश की अकादमिक क्षमता और प्रतिभा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ज्ञान और तकनीक के साझा प्रयासों से विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करेंगे।