बलरामपुर। सोहेलवा जंगल से सटे गांवों में तेंदुओं की दहशत है। आए दिन तेंदुए मवेशियों और लोगों पर हमला कर रहे हैं। किसान एक तरफ जहां खेतों की रखवाली नहीं कर पा रहे, वहीं बच्चों का स्कूल जाना भी दुश्वार हो गया है। वहीं वन विभाग की कोशिश भी जागरूकता अभियान तक सीमित है।
बलरामपुर व श्रावस्ती जिले की सीमा में सोहेलवा वन क्षेत्र 463 वर्ग किलोमीटर में फैला है। सोहेलवा की वादियों में जैव विविधता का खजाना है। प्राकृतिक छटाओं को समेटे यह जंगल अकूत संपदा से भरा है। सोहेलवा जंगल नौ रेंजों में बंटा हुआ है। बरहवा, बनकटवा, जनकपुर, तुलसीपुर यूनिट, भांभर व रामपुर रेंज बलरामपुर और पूर्वी व पश्चिमी रेंज श्रावस्ती जिले में है। सोहेलवा जंगल में चार टाइगर, 75 तेंदुए, 10 हाथी, 500 हिरन, एक हजार लकड़बग्घा, 500 चीतल, एक हजार जंगली सूकर व एक हजार से अधिक वनरोज रहते हैं। बरहवा, बनकटवा, तुलसीपुर यूनिट, भांभर व रामपुर रेंजों के आसपास बसे गांवों में तेंदुओं के हमले बढ़ते जा रहे हैं। तेंदुए रिहायशी इलाकों में आकर पालतू जानवरों पर हमला करके नुकसान पहुंचा रहे हैं। (संवाद)
छह महीने में 46 से अधिक तेंदुओं के हमले
पांच रेंजों में अप्रैल से अगस्त तक छह महीने के अंदर करीब 46 से अधिक तेंदुओं के हमले हो चुके हैं। 12 अगस्त को बरहवा रेंज के कौवा गांव में शाम पांच बजे घास काटने गई माया देवी पर तेंदुए ने हमला करके घायल कर दिया। जनकपुर रेंज के शिवानगर गांव में 16 अगस्त को तेंदुए ने बकरी को निवाला बना लिया। बरहवा रेंज के किठूरा गांव में बकरी व कौवा गांव में 11 अगस्त को तेंदुए ने एक बछड़ा व दो बकरियों को निवाला बना लिया था।
लोहे की जाली लगाकर हमलों को रोकने का प्रयास
बनकटवा रेंज में झौहना से फटवा गांव तक जंगल के पास लोहे की जाली लगाई गई है। इसी तरह से सभी रेंजों में लोहे की जाली लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट मिलने पर सभी रेंजों में लोहे की जाली लगाई जाएगी।
-गौरव गर्ग, डीएफओ