फोटो-13-बलरामपुर के पिपरा दुर्गानगर में खेत में बैठा तेंदुआ।-स्रोत : ग्रामीण
जरवा। सोहेलवा जंगल से सटे गांवों में तेंदुए की लगातार बढ़ती दस्तक से ग्रामीणों में दहशत है। सोमवार सुबह हलौरा गांव में खेत की जुताई कर रहे किसान के ट्रैक्टर के सामने अचानक तेंदुआ आ गया। तेंदुए को देखते ही किसान ट्रैक्टर छोड़कर जान बचाने के लिए भाग निकला। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक तेंदुआ गन्ने के खेत में घुसकर ओझल हो चुका था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
किसान अब्दुल हमीद ने बताया कि वह सोमवार सुबह करीब आठ बजे अपने बेटे आफताब के साथ खेत की जुताई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक ट्रैक्टर के ठीक सामने तेंदुआ आ गया। तेंदुए को देखकर दोनों घबरा गए और ट्रैक्टर छोड़कर दूर भाग खड़े हुए। ग्रामीणों के पहुंचने तक तेंदुआ गन्ने के खेत में जा चुका था।
ग्रामीण अब्दुल अहद, मोहम्मद रफीक, सलमान और जाहिद ने बताया कि तेंदुआ पहले भी कई कुत्तों, बकरियों और मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है। करीब एक वर्ष पहले एक मादा तेंदुए ने गांव में ही तीन शावकों को जन्म दिया था। इसके बाद से क्षेत्र में तेंदुओं की सक्रियता बनी हुई है। इससे ग्रामीण खेतों में जाने और रात में घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।
उधर, प्रतापपुर पिपरा दुर्गानगर गांव के बाहर भी पिछले 15 दिनों से तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिल रही है। ग्रामीण शंकरलाल ने बताया कि रविवार रात वह छत पर सो रहे थे। कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर उन्होंने टॉर्च जलाई तो घर के पीछे तेंदुआ खड़ा दिखाई दिया। शोर मचाने पर तेंदुआ खेतों की ओर भाग गया।
लगातार बढ़ रहे खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल पिंजड़ा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
पिंजड़ा लगाने की तैयारी हो रही : रेंजर
वन क्षेत्राधिकारी अमरजीत प्रसाद ने बताया कि हलौरा के पास नाला और जंगल होने के कारण यह क्षेत्र तेंदुए का प्राकृतिक आवास है। इससे पहले भी चार तेंदुओं को पकड़कर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर गोरखपुर और लखनऊ चिड़ियाघर भेजा जा चुका है। ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है।