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Balrampur News: बंदरों के डर व सड़क पार करने की मजबूरी से छोड़ा स्कूल

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बलरामपुर के प्राथमिक विद्यालय रमवापुर में प्राथमिक विद्यालय भवनियापुर को किया गया विलय ।-संवाद
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हरैया सतघरवा(बलरामपुर)। परिषदीय विद्यालयों के विलय की नीति ने ग्रामीण इलाकों में नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। शिक्षा क्षेत्र हरैया सतघरवा के प्राथमिक विद्यालय भवानियापुर को जब प्राथमिक विद्यालय रमवापुर में विलय किया गया, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह फैसला बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन जाएगा।
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रमवापुर विद्यालय की दूरी भवानियापुर से लगभग दो किलोमीटर है। रास्ते में सागौन का एक घना बाग है, जहां बंदरों का डेरा रहता है। बंदरों के डर से छोटे-छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क भी पार करनी पड़ती है, जिससे अभिभावकों में हर दिन डर बना रहता है। कुछ बच्चों ने निजी स्कूलों में दाखिला ले लिया है तो कुछ ने मजबूरन पढ़ाई छोड़ दी है।
विद्यार्थियों का छलका दर्द
भवानियापुर की कक्षा तीन की छात्रा सुमन ने कहा, पहले स्कूल घर के पास था, रोज आसानी से चली जाती थी। अब रमवापुर जाना पड़ता है, जिसके लिए सड़क पार करना होती है और रास्ते में बंदर भी मिलते हैं। बहुत डर लगता है। वहीं लक्ष्मी ने कहा कि विद्यालय दूर होने के कारण मम्मी-पापा स्कूल नहीं भेज रहे हैं। मैं अकेले स्कूल नहीं जा सकती हूं। इससे पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं।
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अभिभावक भी परेशान
अभिभावक पवनसुत सिंह ने बताया कि अब बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है। रास्ते में सागौन का जंगल है, जहां बंदरों का झुंड रहता है। वे झपट्टा मार देते हैं, जिससे बच्चों में डर बैठ गया है। रामबाबू चौहान ने कहा, रोज सड़क पार करके भेजना होता है। कभी कोई हादसा न हो जाए, यही चिंता लगी रहती है। कुछ बच्चों को मजबूरी में निजी स्कूल में भेजना पड़ा है।
झूठ बोलकर सहमति लेने का आरोप

ग्राम प्रधान बुधना देवी ने कहा कि विद्यालय विलय की सहमति पर झूठ बोलकर हस्ताक्षर करा लिया गया। बताया गया कि विद्यालय विलय हो रहा है, उसे बचाना है और मैनें हस्ताक्षर कर दिया, यह धोखा है। भवानियापुर का स्कूल पहले ठीक चल रहा था। अब जब बच्चे दूर नहीं जा पा रहे, तो उनकी पढ़ाई रुक रही है। हमारी मांग है कि गांव का स्कूल दोबारा खोला जाए या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
स्कूल विलय में सहमति जरूरी
शासन से विलय के लिए जारी आदेश में अभिभावकों और स्कूल प्रबंध समिति की सहमति जरूरी है। ग्राम शिक्षा समिति का अध्यक्ष होने से ग्राम प्रधान की भी सहमति ली जानी है। इसके बाद ब्लॉक से प्रस्ताव बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजा जाता है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति के अनुमोदन पर ही विद्यालय का विलय होना है। कई विद्यालयों में इस नियम की अनदेखी की बात सामने आई है, अभिभावकों व प्रधानों को पूरी जानकारी दिए बिना ही हस्ताक्षर कराए जाने की बात कही जा रही है।
मानकों के अनुसार किया गया है विलय
जहां नदी-नाला जैसी कोई प्राकृतिक बाधा नहीं, वहां शासन के निर्देशानुसार 50 से कम बच्चों वाले विद्यालयों को विलय किया गया है। भवानियापुर विद्यालय में केवल 36 छात्र पंजीकृत थे, इसलिए उसे नजदीकी रमवापुर में विलय कर वहां के शिक्षक को वहीं संबद्ध किया गया है। किसी तरह की विशेष समस्या सामने आती है तो समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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सियाराम वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी
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