उतरौला। ऑनलाइन नामांतरण व्यवस्था के विरोध में तहसील परिसर का माहौल शुक्रवार को फिर गरमा गया। अधिवक्ता संघ के बैनर तले वकीलों ने उपजिलाधिकारी योगेंद्र शरण शाह से मुलाकात कर ऑनलाइन नामांतरण लागू करने संबंधी शासनादेश की प्रति मांगी। चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी योगेंद्र शरण शाह ने अधिवक्ताओं को आश्वस्त किया कि वह जिलाधिकारी से वार्ता कर उनकी मांगों से अवगत कराएंगे और समाधान के लिए आवश्यक पहल करेंगे। आंदोलन के कारण तहसील न्यायालय में 215 मुकदमों की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे वादकारियों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। चमरूपुर से आए हबीब खान, मसीहाबाद से महफूज, गौरा चौराहा से सुमित कुमार व नगर के आशीष कुमार ने बताया कि बिना सुनवाई के वापस लौट रहे हैं, इससे आर्थिक परेशानी के साथ एक अनिश्चितता बनी हुई है।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन नामांतरण की पत्रावलियों में आपत्तियां तक दर्ज नहीं की जा रहीं। संबंधित पेशकार को भी इस कार्य से रोक दिया गया है, जिससे वादकारियों को न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है। अध्यक्ष प्रह्लाद यादव ने कहा कि ऑनलाइन नामांतरण की व्यवस्था जनता पर जबरन थोपी जा रही है। अधिवक्ता संघ इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा और इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। महामंत्री रवि शंकर मिश्र ने तत्काल व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की, जबकि पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने आरोप लगाया कि नई प्रणाली के नाम पर आम लोगों का शोषण किया जा रहा है। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद सोनी, देवेंद्र कुमार, रामचंद्र जायसवाल, गणेश नंदन, अमित श्रीवास्तव, भूषण लाल, सुनील श्रीवास्तव, लालजी मिश्र, अशोक दूबे, इजहारुल हसन, राधेश्याम यादव, महेंद्र पांडेय समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।