नेपाल सीमा पर लगी बंदिशों ने न सिर्फ कारोबार की रौनक छीन ली है, बल्कि दोनों ओर के रिश्तों में भी दूरी बढ़ा दी है। बालापुर और मणिपुर बाजार के दुकानदार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर हैं। यहां के लोगों की रिश्तेदारी भी नेपाल में हैं। ऐसे में वे सीमापार परिजनों से मिलने की राह ताक रहे हैं।
बालापुर बाजार के मिठाई व्यापारी लाले यादव और संतोष कमलापुरी कहते हैं कि रोजाना नेपाल से बड़ी संख्या में ग्राहक आते थे। उनकी आवाजाही से बाजार जीवंत रहता था। अब दुकानें सूनी हैं और समय काटना मुश्किल हो रहा है। किराना व्यापारी श्यामसुंदर व कुक्कू बताते हैं कि उनकी 60 फीसदी बिक्री नेपाली ग्राहकों पर निर्भर थी। इसी तरह अन्य दुकानदारों को भी नेपाल की राह खुलने का इंतजार है, जिससे उनके व्यापार को उड़ान मिल सके।
पांच दिनों से अधिक की बंदिशों के बाद अब हर कोई यही दुआ कर रहा है कि हालात स्थिर रहें। रोटी-बेटी की डोर और मजबूत हो। बाजार गुलजार हों और रिश्तेदार गले मिल सकें।
मोबाइल पर रिश्तों का हाल
क्षेत्र के संतोष गुप्ता बताते हैं कि उनके रिश्तेदार गुलाब गुप्ता नेपाल के चंद्रोटा में किराना स्टोर चलाते हैं। हाल के दिनों में तीन दिन तक कोई संपर्क न हो पाया, तो चिंता बढ़ गई। अब मोबाइल पर फोटो भेजकर हालचाल बताते हैं, वही तस्वीरें सुकून देती हैं। चक्रधारी गुप्ता के मौसा सतीश गुप्ता गढ़वा में होटल चलाते हैं। बदले हालात में कारोबार बंद है। सत्यप्रकाश की पत्नी कपिलवस्तु गई हैं। वह उन्हें लाने के लिए नेपाल जाना चाहते हैं। उनकी आंखों में इंतजार साफ झलकता है।
साप्ताहिक मंडी की रौनक गुम
मणिपुर बाजार के रामप्यारे कहते हैं कि हर रविवार को नेपाल के लोग लोहे का सामान खरीदने आते थे, अब धंधा ठंडा है। आलू व्यापारी शमशाद और चावल व्यापारी आशाराम कहते हैं कि स्थानीय खरीद उतनी नहीं होती। नेपालियों की खरीदारी से ही बाजार गुलजार रहता था। वह कहते हैं कि रविवार को बाजार तो लगेगा, लेकिन साथी (नेपाल से आने वाले ग्राहकों को इसी नाम से लोग पुकारते हैं) का साथ नहीं मिल सकेगा। इससे व्यापार मंदा रहने की आशंका है।
सतर्कता कायम, हर आने-जाने वाले की संघन जांच
सीमा क्षेत्र में शांति होने के बाद भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है। पीएसी, एसएसबी और पुलिस टीम लगातार गश्त कर रही है। जरवा चेक पोस्ट पर हर आने-जाने वालों की सघन जांच हो रही है। प्रभारी निरीक्षक राकेश पाल ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चौकसी बढ़ाई गई है।
नेपाल में बवाल से बलरामपुर डिपो को 10 लाख की चपत
बलरामपुर।
नेपाल के हालात से बलरामपुर डिपो को अब तक 10 लाख रुपये की चपत लग चुकी है। पांच दिनों से नेपाल से सटी बढ़नी सीमा पर जाने वाली रोडवेज बसों की कमाई को बड़ा झटका लगा है। बढ़नी से दिल्ली व कानपुर के लिए प्रतिदिन 10 से 12 बसों का संचालन होता है। सवारी न मिलने से बढ़नी जाने वाली रोडवेज बसें खाली आ रही हैं।
एआरएम गोपीनाथ दीक्षित ने बताया कि नेपाल में बवाल के चलते बलरामपुर डिपो को अब तक सबसे अधिक नुकसान हुआ है। नेपाल में हिंसा के बाद से रोडवेज बसें बॉर्डर क्षेत्रों से खाली ही लौट रही हैं।