बलरामपुर। पीएफआई के नेपाल सीमा तक कनेक्शन की खुफिया एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले से महाराष्ट्र के पुणे तक पीएफआई के तार जुड़े होने के इनपुट मिलने पर भी पुलिस व खुफिया एजेंसियां छानबीन में जुट गईं हैं। जबकि विगत दस साल में करोड़पति बने 50 लोगों की जो सूची तैयार की गई है, उसमें से अब हर एक की कुंडली भी तैयार की जा रही है। इससे जिले में हड़कंप मचा है।
विदित हो कि सोमवार रात एसटीएफ तथा खुफिया एजेंसियों ने जिले में पीएफआई से जुड़े स्थानीय लोगों की पड़ताल की। इस दौरान 50 ऐसे लोग खुफिया एजेंसियों की रडार पर आए जो बीते 10 साल में करोड़पति बने हैं। सूत्रों की मानें तो जिले का एक व्यक्ति जो कि महाराष्ट्र के पुणे में परिवार सहित रहता है
उसके घर भी टीम गई थी। मगर घर पर ताला बंद था। अब पुणे से उसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। इसी तरह जिले में ऐसे 50 नव धनाड्यों की सूची बनाई गई है। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो कुछ समय पहले तक साइकिल से चलते थे मगर अब बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं।
इन लोगों की आय के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। नेपाल सीमा से जुड़े सभी नव धनाड्यों पर पुलिस की नजर है। इनका क्या कारोबार है? गुपचुप तरीके से इसकी पड़ताल भी हो रही है। मामला गोपनीय बताकर पुलिस अधिकारी इस बारे में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
वर्ष 2011 में तत्कालीन एसपी जे. रविंदर गौड़ ने 71 नव धनाड्यों की सूची तैयार कराई थी। ये सभी नेपाल सीमा से जुड़े गांवों व कस्बों के रहने वाले थे। इस सूची में अवैध तरीके से धन अर्जित कर करोड़पति बने वन माफिया व कई तस्कर भी शामिल थे। इन पर अंकुश लगाने के लिए एसपी ने ये सूची बनवाई थी। मगर इसी बीच एसपी का तबादला हो गया था, इसके चलते नव धनाड्यों की सूची ठंडे बस्ते में चली गई।