बलरामपुर। जिले की समृद्ध थारू जनजातीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की राह आसान हुई है। इमलिया कोडर स्थित थारू जनजाति संग्रहालय एवं सजीव धरोहर परिदृश्य ने प्रतिष्ठित भारतीय उपमहाद्वीप उत्तरदायी पर्यटन पुरस्कार-2026 के अंतिम दौर में जगह बनाई है। पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा चार सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय उत्तरदायी पर्यटन केंद्र की ओर से घोषित पुरस्कार के अंतिम दौर में भारत, नेपाल और श्रीलंका की 22 उत्कृष्ट पहल शामिल हैं। इनका चयन उत्तरदायी पर्यटन के क्षेत्र में प्रभावी कार्य, नवाचार, अन्य स्थानों पर अपनाए जा सकने वाले मॉडल, व्यापक प्रभाव और सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर किया गया है।
इमलिया कोडर का थारू संग्रहालय केवल पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि थारू समुदाय की जीवंत संस्कृति, परंपराओं, लोककला, रहन-सहन और पारंपरिक ज्ञान से पर्यटकों को परिचित कराने का केंद्र भी है। यहां स्थानीय समुदाय की भागीदारी से सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन ने कहा कि इमलिया कोडर की इस उपलब्धि से बलरामपुर की पहचान देश-दुनिया में और मजबूत होगी। थारू समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए पर्यटन से जोड़ना जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय समुदाय को पर्यटन विकास में सहभागी बनाने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
अंतिम दौर में शामिल सभी पहलों को स्वर्ण, रजत या उभरती उत्कृष्ट पहल के रूप में सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार समारोह चार सितंबर को यशोभूमि सम्मेलन केंद्र, द्वारका, नई दिल्ली में आयोजित होगा।
थारू विरासत को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
थारू विरासत को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान