बलरामपुर। जिले में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ बेहतर खेल मैदान, आधुनिक खेल सामग्री और नियमित प्रशिक्षण की है। यदि सभी माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को शुरू से ही बेहतर खेल वातावरण मिले, तो यहां के खिलाड़ी भी प्रदेश और देश स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
यदि माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों को बेहतर खेल का माहौल तो यहां के खिलाड़ी विभिन्न खेलों में होनहार बन सकते हैं। आलम यह है कि जिले में संचालित माध्यमिक विद्यालयों में संसाधन तो दूर ठीकठाक खेल मैदान नहीं है। राजकीय विद्यालय हो या सहायता प्राप्त दो-चार को छोड़कर कहीं भी खेल मैदान की व्यवस्था नहीं है। जिला मुख्यालय स्थित सरकारी सहायता प्राप्त एमडीके इंटर कॉलेज, बलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज, राजकीय विद्यालय दारीदौरा, भारतीय विद्यालय इंटर कॉलेज उतरौला, राजकीय इंटर कॉलेज गैसड़ी, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज उतरौला व महराजगंज तराई में खेल मैदान की व्यवस्था नहीं है।
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विद्यार्थियों को मिलना चाहिए मौका
पूर्व हॉकी खिलाड़ी रश्मि सिंह व मोहम्मद हसन कुरैशी का कहना है कि विद्यार्थी जीवन खेल प्रतिभा को निखारने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उम्र में बच्चों की शारीरिक क्षमता, अनुशासन और खेल कौशल तेजी से विकसित होता है। ऐसे में खेल में रुचि रखने वाले 15 वर्ष तक के बच्चों को बेहतर खेल का वातावरण मिलना चाहिए।
मिला मौका तो खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा
नगर के डीएवी इंटर कॉलेज की छात्रा कंचन ने पिछले वर्ष सितंबर में राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया था। 23 से 25 सितंबर के बीच प्रयागराज में आयोजित हुए राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता नार्थ जोन में कंचन ने लंबी कूद स्पर्धा में पहला स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया था। इसके अलावा कंचन ने 14 से 16 सितंबर 2025 के बीच प्रयागराज के पंडित मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में हुए 66वीं प्रदेश स्तरीय एथलेक्टिस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल की थी। एजी हाशमी इंटर कॉलेज की छात्रा मधु भी प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में मेडल जीत चुकी हैं। एमवाई उस्मानी इंटर कॉलेज उतरौला के विद्यार्थी मनोज कुमार प्रदेश स्तरीय क्रिकेट व आनंद कुमार योग प्रतियोगिता में खेल चुके हैं। इसी तरह भारतीय विद्यालय इंटर कॉलेज उतरौला के विद्यार्थी जयंत नाथ, जनित नाथ व स्वदेश नाथ राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुके हैं। टीम में ये तीनों खिलाड़ी शामिल थे।
कुंद हो रही खेल प्रतिभा
जिले में राजकीय, सहायता प्राप्त व स्ववित्त पोषित व समाज कल्याण को मिलाकर करीब 168 माध्यमिक विद्यालय संचालित है। यदि एक विद्यालय से तीन-तीन ही विद्यार्थी किसी खेल में आगे बढ़े तो जिले से हर साल 500 से अधिक खिलाड़ी जिले में तैयार हो जाएंगे। विद्यालयों में संसाधन के अभाव में इनमें से अधिकांश की खेल प्रतिभाएं कुंद हो रही हैं।
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फैक्ट फाइल
राजकीय माध्यमिक विद्यालय - 22
खेल प्रशिक्षकों की तैनाती - 05
सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालय - 19
एडेड माध्यमिक विद्यालयों में खेल शिक्षक - 11
निजी (स्व वित्त पोषित) माध्यमिक विद्यालय - 125
कंचन
कंचन
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