सादुल्लाहनगर। नेवादा गांव में शुक्रवार को पति की अचानक हुई मौत के सदमे को पत्नी बर्दाश्त नहीं कर सकी। पति के शव के पास रोते-राेते पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। महज एक घंटे के भीतर मां-बाप को खोने के बाद बच्चों को गहरा सदमा लगा। पड़ोसियों से उन्हें मुश्किल से संभाला। एक ही घर से साथ दो जनाजे उठे तो गांव के हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
नेवादा गांव के अब्दुल्लाह (65) हृदय रोग से पीड़ित थे। उनका इलाज भी चल रहा था। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे अचानक उनके सीने में दर्द उठा और वह अचेत होकर गिर पड़े। परिजनों ने उन्हें उठाकर लिटाया। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाते तब तक उनकी मौत हो गई। अब्दुल्लाह की मौत से पत्नी रुखसाना को गहरा सदमा लगा। वह शव के पास फूट-फूटकर रोने लगीं। वह रोते-रोते कई बार बेहोश हुईं। बच्चों ने उन्हें संभालने की बहुत कोशिश की, लेकिन पति की मौत के सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकीं और दम तोड़ दिया।
दोपहर बाद दोनों के जनाजे एक साथ उठे। सैकड़ों लोग जनाजे में शामिल हुए। रिश्तेदार, पड़ोसी और दूर-दूर के गांवों से पहुंचे लोग इस दृश्य को देखकर अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके। ग्रामीणों का कहना है कि विवाह के बाद से ही दोनों एक-दूसरे की ताकत बने रहे। अब्दुल्लाह जहां परिवार और खेत-खलिहान के काम में लगे रहते थे, वहीं रुखसाना हर समय उनके साथ खड़ी रहती थीं।
मां-बाप की एक साथ मौत ने बच्चे हुए बदहवास
अब्दुल्लाह और रुखसाना के दो बेटियां और चार बेटे हैं, सभी विवाहित हैं। माता-पिता की एक साथ मौत पर बेटी रिजवाना (37) और मुनतशीरुन्निसा (43) का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं बेटे हबीबुल्लाह (45), कुतबुल्लाह (40), इरफान (36) व इमरान (30) भी सदमे में हैं। मां-पिता की मौत के बाद से घर में मातम पसरा हुआ है। अंतिम विदाई के समय सभी बच्चे शवों से लिपटकर रोते रहे। गांव वाले भी उनकी स्थिति देखकर भावुक हो उठे।
50 साल का साथ, साथ ही हुए विदा
अब्दुल्लाह और रुखसाना की शादी को लगभग 50 साल पूरे हो चुके थे। गांव में उनकी जोड़ी को हमेशा आदर्श दंपती के रूप में देखा जाता था। लोग बताते हैं कि दोनों हमेशा साथ रहते, साथ खाते और एक-दूसरे की हर सुख-दुख में बराबर शामिल रहते थे। ग्रामीणों का कहना है कि 50 वर्षों के संबंध में कभी दोनों के बीच अनबन भी नहीं रहती थी।