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Balrampur News: जंगल पार कर 30 किमी दूर परीक्षा देने कैसे जाएंगी थारू बेटियां

Wed, 28 Oct 2026 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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फोटो-31-बलरामपुर के बसंत लाल स्मारक इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य से वार्ता करती छात्राएं ।-संवाद
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जरवा। यूपी बोर्ड परीक्षा-2027 के लिए जारी प्रस्तावित परीक्षा केंद्रों की सूची ने नेपाल सीमा से सटे थारू बहुल गांवों की छात्राओं की चिंता बढ़ा दी है। गैंसड़ी शिक्षा क्षेत्र के बालापुर जरवा स्थित बसंतलाल स्मारक इंटर कॉलेज को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है। ऐसे में यहां पढ़ने वाली छात्राओं को परीक्षा देने के लिए करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर गैसड़ी जाना पड़ेगा। घने जंगलों, पहाड़ी नालों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्र में रहने वाली छात्राओं के लिए यह दूरी महज परेशानी नहीं, बल्कि सुरक्षा का सवाल भी बन गई है।
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बेतहनिया, मोहकमपुर, सोनगढ़ा, मुतेहरा, अकलघरवा, नेवलगढ़ और पहाड़ापुर जैसे गांव जंगलों से घिरे हैं। इन गांवों की सैकड़ों छात्राएं रोजाना करीब 10 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर या पैदल स्कूल पहुंचती हैं। अब परीक्षा केंद्र दूर होने से उनके सामने आवागमन के साधन जुटाने, किराये का खर्च उठाने और सुरक्षा की समस्या खड़ी हो गई है।

मुतेहरा की छात्राएं पूजा कुमारी, सोनी, प्रीती और लक्ष्मी ने कहा कि जंगलों और पहाड़ी नालों के बीच से गुजरने वाले रास्तों पर सफर करना पहले से ही मुश्किल है। परीक्षा देने के लिए गैसड़ी तक जाना पड़ा तो उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी। भोलाडीह की अंबिका, दर्जनिया की श्वेता तथा नेवलगढ़ की चित्रा थारू और प्रिया थारू का कहना है कि उनका विद्यालय परीक्षा केंद्र निर्धारण के मानकों को पूरा करता है। इसके बावजूद इसे केंद्र नहीं बनाया गया। छात्राओं ने इसे सीमावर्ती क्षेत्र की बेटियों की पढ़ाई से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
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किराया जुटाएं या परिवार का पेट पालें

सीमावर्ती गांवों के कई परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके गुजर-बसर करते हैं। अभिभावक लोकनाथ, रामधीरज, चंद्रप्रकाश, छबीले और बंशी ने बताया कि परीक्षा केंद्र दूर होने के कारण रोजाना आने-जाने के लिए किराये या निजी साधन का इंतजाम करना पड़ेगा। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। वहीं, मजदूरी छोड़कर बच्चों को परीक्षा दिलाने ले जाना भी मुश्किल होगा।

जरवा में चाय की दुकान चलाने वाले अभिभावक कय्यूम ने बताया कि बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए उन्हें दुकान बंद रखनी पड़ सकती है। इससे उनकी रोजाना की कमाई प्रभावित होगी।

तीन साल से प्रयास, फिर भी नहीं बना केंद्र

विद्यालय के प्रधानाचार्य शब्बीर हसन ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनवाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, विद्यालय केंद्र निर्धारण के मानकों को पूरा करता है। कुछ दिन पहले माध्यमिक शिक्षा विभाग और तहसील स्तर के अधिकारी दो बार विद्यालय का निरीक्षण भी कर चुके हैं। इसके बावजूद प्रस्तावित सूची में विद्यालय का नाम शामिल नहीं होने से छात्राओं के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है।

महाराणा प्रताप जनजातीय संघ के अध्यक्ष मदन लाल ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाने के साथ ही इसे स्थायी रूप से केंद्र निर्धारित करने की मांग उठाई है।

अभी केंद्र बनने की पूरी गुंजाइश

जिला विद्यालय निरीक्षक मृदुला आनंद ने बताया, बोर्ड परीक्षा के लिए जारी की गई 70 केंद्रों की सूची अंतिम नहीं है। अभी पूरी गुंजाइश है। समस्या की जानकारी हुई है। आपत्ति देने का समय 28 अक्तूबर तक है। आपत्ति मिलने पर बोर्ड के नियमों के तहत उसका निस्तारण किया जाएगा।
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