फोटो-7-बलरामपुर के सीएचसी उतरौला में मरीज की जांच करते चिकित्सक ।-संवाद
उतरौला। तहसील क्षेत्र के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके, इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा दिया गया था, लेकिन फिर भी सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया। एफआरयू के रूप में विकसित होने के बाद भी यहां पर मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं है। यहीं नहीं सामान्य सर्जन न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला में मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा देने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों को उसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सक व संसाधनों की कमी मरीजों की इलाज में बाधा बन रही है। नगर के शुभम गुप्त, राहुल मोदनवाल, मंतसा व शाबाना ने बताया कि स्थानीय लोग काफी दिनों से सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था किए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी व जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। अल्ट्रसाउंड मशीन न होने के कारण गर्भवती व अन्य पेट के मरीजों को 500-700 रुपये जांच के लिए खर्च करने पड़ते हैं। इसमें अस्पताल के चिकित्सकों का कमीशन भी शामिल रहता है। सर्जन की तैनाती न होने के कारण छोटा-बड़ा ऑपरेशन कराने के लिए मरीज परेशान होते हैं। जिला मुख्यालय व निजी अस्पतालों का चक्कर काटते रहते हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग कई वर्षों से की जा रही है। यदि मशीन आ जाए तो गर्भवती महिलाओं व अन्य मरीजों को सुविधा मिलेगी। जनरल सर्जन की तैनाती के लिए पत्र लिखा जा चुका है।
मेडिकल स्टोर व निजी सेंटर के एजेंटों का रहता है जमावड़ा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उतरौला में मरीज मुफ्त इलाज की आस में आते हैं। वहीं मरीजों को ठगने के लिए सीएचसी परिसर में मेडिकल स्टोर व निजी जांच केंद्रों के एजेंटों का जमावड़ा रहता है। मरीजों को कम दाम में दवा दिलाने का लालच देकर बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदवाने ले जाते हैं। इसी तरह बाहर से खून, अल्ट्रासाउंड व एक्सरे जांच के लिए भी मरीजों को परेशान करते रहते हैं। स्थानीय निवासी शनि व पप्पू ने बताया कि अस्पताल के सामने कई मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं, जहां पर कई प्रकार की प्रतिबंधित दवाएं भी बिकती हैं।