गोंडा। स्वाशासी चिकित्सा महाविद्यालय के बाबू ईश्वर शरण अस्पताल में 10 साल बाद हृदय संबंधी जांच की सुविधा शुरू हो गई। कोरोना के समय में खरीदी गई मशीनों को कोविड बिल्डिंग में स्थापित कर हृदयाघात के लक्षण की स्क्रीनिंग की जाएगी। मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ने शुक्रवार से ओपीडी की शुरुआत की है। जिससे हर रोज 50 से अधिक हृदयरोगियों को राहत मिलेगी।
ठंड बढ़ने से साथ हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की भीड़ भी अस्पतालों में बढ़ने लगी है। जिले में हर रोज करीब बीस लोगों को दिल का दौरा पड़ रहा है। लेकिन अस्पताल में हृदय संबंधी जांच व कार्डियोलॉजिस्ट की व्यवस्था न होने मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही थी।
तत्कालीन जिला अस्पताल परिसर में बने क्षेत्रीय निदान केंद्र में हृदय रोगियों की जांच के लिए टू-डी ईको व टीएमटी मशीनों की खरीद की गई थी। जो वर्ष 2013 में खराब होने के बाद कंडम घोषित कर दी गई। तभी से सिर्फ ईसीजी के सहारे हृदय रोगियों का इलाज चल रहा है। हृदय की बीमारी समय से न पता होने के कारण मरीजों को हृदयाघात की दिक्कत हो जाती है।
अमर उजाला के माई सिटी में
गोल्डन ऑवर में नहीं मिला इलाज हार्ट अटैक से दो युवकों की गई जान शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की नींद खुली। प्राचार्य ने कोरोना संक्रमण के समय खरीदी गई मशीनों का उपयोग करने की अनुमति देते हुए एसोसिएट प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. एजाज हुसैन को ओपीडी में स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया।
कोविड बिल्डिंग के 11 नंबर कक्ष में स्थापित टू-डी इको कार्डियोग्राफी का प्रयोग दिल की संरचनाओं की वास्तविक गति को देखने के लिए किया जाता है। हृदय की 60 प्रतिशत से अधिक पंपिंग होने पर सामान्य माना जाता है जबकि 40 प्रतिशत पंपिंग पर दिल में दिक्कत होना बताया जाता है। वहीं 30 प्रतिशत से कम होने पर हार्ट अटैक की आशंकाएं बढ़ जाती है। इस जांच में दो से तीन मिनट का समय लगता है। टीएमटी में व्यक्ति को ट्रेड-मिल-मशीन पर तेज-तेज लगभग 5 से 10 मिनट चलाया जाता है। टेस्ट के दौरान धीरे-धीरे मशीन की स्पीड व एंगल बढ़ाते हैं। इस दौरान मरीज का ईसीजी मॉनीटर किया जाता है। यदि शुरू व बाद की ईसीजी में काफी अंतर पाया जाए तो टेस्ट को पॉजिटिव माना जाता है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने बताया कि हृदय संबंधी बीमारी की पहचान के लिए जांच की सेवा शुरू कर दी गई है। जल्द ही शासन स्तर से हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती कर मरीजों को उपचार शुरू कर दिया जाएगा। ठंड में हृदयरोगियों की संख्या बढ़ जाती है।