बलरामपुर। अब आठ जून से न्यायालयों में नए ढंग से मुकदमों की सुनवाई की जाएगी। जिला जज सुरेंद्र सिंह प्रथम ने गुरुवार को हाईकोर्ट के निर्देश पर मुकदमों की सुनवाई से संबंधित प्रारूप जारी किया है। न्यायिक अधिकारियों, वकीलों व वादकारियों के लिए शर्तें निर्धारित की गई हैं।
जिला जज ने बताया कि न्यायिक व प्रशासनिक कार्यों का संपादन हाईकोर्ट के निर्देश पर आठ जून से किया जाएगा। न्यायिक कार्य करने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल न्यायालय परिसर छोड़ना होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय की कार्रवाई के लिए अपर जनपद न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश का न्यायालय पूर्व से निर्धारित है। वकील न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने वादों की पैरवी कर सकते हैं।
प्रत्येक न्यायिक अधिकारी के लैपटॉप पर जीआईटीएसआई लैन अपलोड है। न्यायिक अधिकारियों को जेल में निरुद्घ दोष सिद्ध बंदियों से संबंधित रिमांड/अन्य न्यायिक कार्यों का संपादन मात्र जीआईटीएसआई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से करना होगा। नए वाद/प्रार्थनापत्र केंद्रीकृत कंप्यूटर अनुभाग में प्राप्त किए जाएंगे और प्रार्थनापत्र सीआईएस पर पंजीकृत होंगे।
प्रार्थनापत्र में वकील/वादकारी का विवरण व मोबाइल नंबर अंकित किया जाएगा जिससे प्रार्थनापत्र में कमी होने पर वकील को सूचित किया जा सके। अधिवक्ता बेल एप्लीकेशन, एंटीसिपेटरी बेल/रिटर्न आर्ग्यूमेंट अब ई-मेल पर भेज सकते हैं। सभी न्यायालयों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ न्यायिक कार्यों का निस्तारण कराया जाएगा। न्यायालयों में केवल उन्हीं वकीलों के प्रवेश की अनुमति होगी जिनका वाद सुनवाई के लिए नियत है। जिला जज ने सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि न्यायालय कक्ष में कम से कम संख्या में वकील व वादकारी उपस्थित हों।
पुरुष व महिला वकीलों को न्यायालय में आने के लिए वेशभूषा में छूट दी गई है। पुरुषों के लिए सफेद शर्ट बैंड के साथ, हल्के रंग की पैंट व महिला के लिए हल्के रंग की पोशाक व बैंड धारण करने के लिए कहा गया है। न्यायिक अधिकारियों को कोट व गाउन पहनने से छूट दी गई है। असुविधा का निराकरण कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी रामसेवक के मोबाइल नंबर 8858155680 व प्रशासनिक लिपिक प्रदीप कुमार के नंबर 7985486255 पर संपर्क कर सकते हैं। ये व्यवस्था आठ जून से लागू होगी।