बलरामपुर। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों में उफान से जिले में हाहाकार मच गया है। शहर से लेकर गांवों तक हर तरफ पानी ही पानी दिख रहा है। बलरामपुर शहर समेत 355 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें से करीब 150 गांव टापू बन गए हैं। नेशनल हाइवे 730 पर भी पानी आने से हल्के वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। कई अन्य रास्तों पर भी आवागमन बाधित है। वहीं, बारिश व बाढ़ से करीब 70 हजार हेक्टेअर धान व गन्ने की फसल डूब गई है।
राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ के चलते जिले में करीब 355 गांव पानी से घिर गए हैं। इनमें से करीब 150 गांव तो टापू बन गए हैं। इन गांवों के लोग घरों में कैद हो गए हैं। गांव से निकलने का कोई रास्ता भी नहीं है। बिजली गुल और मोबाइल टावर भी बंद हैं। ऐसे में बाढ़ पीड़ित मदद के लिए किसी की मदद भी नहीं ले पा रहे हैं।
प्रशासन के बचाव व राहत कार्य नाकाफी साबित हो रहे हैं। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सदर तहसील क्षेत्र में देखा जा रहा है। लालनगर, दुर्गापुर, गुरचाही, शेरूपुर, खदगौरा, बेनीजोत, भैंसहवा, कठौवा, डबकी, कपसौरा, सद्दोपुर, भिवरा आदि गांव टापू बन गए हैं। कई घरों में पानी भर गया है। ऐसे में लोग छत पर शरण लिए हैं। राप्ती नदी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बाढ़ की स्थिति और भयावह होने की आशंका है। शहर के चारों तरफ बनाए गए बांध पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बलरामपुर से तुलसीपुर जाने वाले नेशनल हाइवे 730 पर मेवालाल पुलिस चौकी के निकट बाढ़ का पानी भर गया है। यहां एक बाइक सवार बाढ़ के तेज बहाव में बहने लगा तो पुलिसकर्मियों ने रस्सी के सहारे किसी तरह उसे बचाया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे डीएम डॉ. महेंद्र कुमार ने एनएच पर हल्के वाहनों का आवागमन बंद करा दिया है। लगातार पानी बढ़ने से भारी वाहनों का आवागमन भी बंद होने के आसार हैं। बलरामपुर से बहराइच जाने वाले एनएच पर भी घुघुलपुर के निकट पानी आ गया है। इसके अलावा हरिहरगंज-कोड़री मार्ग, कोड़री-मथुरा बाजार मार्ग और गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग पर भी बाढ़ के चलते आवागमन बंद है।
जिले में बाढ़ से निपटने की प्रशासन की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं। एसडीआरएफ व पीएसी की बाढ़ राहत इकाई के जवान बाढ़ राहत व बचाव कार्यों में जुटे हैं। शुक्रवार को कटान व बाढ़ की जद में आए सदर तहसील के गंगा बख्श भागड़ गांव में शनिवार को पीएसी की बाढ़ राहत इकाई के जवान भेजे गए। जवानों ने गांव के सभी लोगों को घरों से निकालकर नजदीकी बाढ़ चौकी पर पहुंचा दिया। जहां ग्रामीणों के भोजन आदि की व्यवस्था कराई गई। राहत व बचाव कार्यों के लिए शनिवार शाम एनडीआरएफ को भी बुला लिया गया।
राप्ती नदी की बाढ़ का पानी शनिवार सुबह बलरामपुर शहर में भी प्रवेश कर गया। पहलवारा, बलुहा मोहल्ला तथा श्याम बिहार कॉलोनी व धुसाह गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। श्याम बिहार कॉलोनी में घर से निकलने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। घरों के बाहर खड़ी कार व बाइकें पानी में डूब गईं हैं। लोगों ने छतों पर शरण ले रखी है। शहर की सुरक्षा के लिए बने बांध पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो शहर के कई हिस्से जलमग्न हो सकते हैं। नगर से खमौवा जाने वाले मार्ग पर पानी भरने से आवागमन ठप हो गया है। सेंट जेवियर्स स्कूल के आसपास लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं।
श्रावस्ती जिले की सीमा पर घुघुलपुर गांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में करीब चार फीट तक बाढ़ का पानी भर गया है। प्राचार्य गीता मिश्रा ने बताया कि एसडीएम सदर राजेंद्र बहादुर के निर्देश पर 381 में से 371 विद्यार्थियों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर परिजनों व रिश्तेदारों के हवाले कर दिया है। 10 बच्चे अभी भी विद्यालय में बचे हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाएगा।
महराजगंज तराई में खरझार पहाड़ी नाले में आई बाढ़ के चलते क्षेत्र के पूरेछीटन, अमरहवा, बरगदही, किठुरा, रूपनगर, औरहिया, बनकटवा, रामगढ़ मैटहवा, पृथ्वीपुर, परसिया गौरी, कनहरा, मधनगर, पटोहाकोट, नन्हुआपुर, विजयीडीह, सुगानगर लहेरी, बेला, साखीरेत, हड़पुर जनकपुर आदि गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
इन गांवों के दिनेश यादव, जगतराम, स्वामीनाथ, अर्जुन व माता प्रसाद आदि ने बताया कि घरों में पानी भरा है। चूल्हे नहीं जल रहे हैं। मवेशी पानी में फंसे हैं। मगर क्षेत्र में बनी बाढ़ चौकी से भी लोगों को किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही है। इस बारे में नायब तहसीलदार राजीव वर्मा ने बताया कि 12 ग्राम पंचायतों को नाव उपलब्ध कराई गई है। शीघ्र ही पीड़ितों को राहत सामग्री मुहैया कराई जाएगी।
ललिया थाना क्षेत्र के शेखनपुरवा गांव में शनिवार दोपहर बाढ़ के पानी में नहाते समय आलम (17), दिलदार (15) तथा जीशान (13) अचानक तेज बहाव में बह गए। आसपास के लोगों ने तीनों को बचाने का प्रयास किया। दिलदार को लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मगर आलम और जीशान लापता हैं। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि बाढ़ के पानी का बहाव तेज है। पीएसी तथा स्थानीय गोताखोरों की मदद से लापता किशोरों को ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है।
बाढ़ की विभीषिका के बीच सदर, तुलसीपुर तथा उतरौला तहसील के करीब 500 गांवों की बिजली गुल है। करंट से हादसे की आशंका के मद्देनजर शहर की श्याम बिहार कॉलोनी की बिजली भी काट दी गई है। ऐसे में लोग मोबाइल तक चार्ज नहीं कर पा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल टावर भी ठप हो गए हैं। नेटवर्क न होने के कारण बाढ़ पीड़ित अपनी पीड़ा भी प्रशासन, मित्र या किसी रिश्तेदार को नहीं बता पा रहे हैं।
तुलसीपुर विद्युत उपकेंद्र में बाढ़ का पानी भरने से देवीपाटन शक्तिपीठ की बिजली भी शुक्रवार शाम ठप कर दी गई है। गुरचाही निवासी माता प्रसाद ने बताया कि बिजली न होने से मोबाइल काम नहीं कर रहा है। कई घरों के लोग छत पर शरण लिए हुए हैं। इसी तरह पतझी निवासी सुरेंद्र ने बताया कि गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा है। मोबाइल डिस्चार्ज है। ऐसे में कुशलक्षेम जानने के लिए रिश्तेदार भी परेशान हैं। वहीं, विभागीय अधिकारी सुरक्षा के दृष्टिकोण से विद्युत आपूर्ति बहाल करने में असमर्थता जता रहे हैं।
डीएम डॉ. महेंद्र कुमार, एसपी राजेश सक्सेना व एडीएम राम अभिलाष ने शनिवार को शारदा पब्लिक स्कूल के पास नेशनल हाईवे पर जाकर बाढ़ का जायजा लिया। डीएम ने सभी बाढ़ चौकियों व राहत केंद्रों पर राहत व बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। बाढ़ में उतरने वाले राजस्व व पुलिसकर्मियों को लाइफ जैकेट मुहैया कराने की बात कही। एसपी ने बताया कि एसडीआरएफ व पीएसी की बाढ़ राहत इकाई के जवान बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं। एनडीआरएफ की टीम भी बुला ली गई है। लोगों से अपील है कि वह खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। तेज बहाव व गहरे पानी में जाने से बचें।
कोई भी बाढ़ पीड़ित व्यक्ति कंट्रोल रूम के नंबर 8960010336, 9170277336, 7706881121 तथा 1077 पर फोन कर अपनी समस्या दर्ज करा सकता है। पीड़ित को तत्काल मदद पहुंचाई जाएगी। कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित किया जा रहा है।