बलरामपुर। बीते दिनों राप्ती नदी तथा पहाड़ी नालों में आई बाढ़ के चलते करीब 100 गांव प्रभावित हुए थे। बाढ़ का असर खत्म होने के बाद अब गांवों के आसपास जलभराव है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने के चलते करीब 30 गांवों के लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। कीचड़ तथा गंदगी के चलते इन क्षेत्रों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
विदित हो कि बाढ़ का असर सबसे अधिक गौरा चौराहा, गैसड़ी तथा पचपेड़वा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। जुड़ीकुइयां गांव के आसपास जलभराव के चलते लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग पर लगातार पांचवें दिन भी आवागमन बाधित है।
देवलहा, गोकुलापुर, डिहवा, मिश्रौलिया, गोविंदपुर, वीरपुर, थरूआ, थारुइनिया सहित करीब 30 गांवों में अभी भी जलभराव व कीचड़ से लोग परेशान हैं। इन गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा धान व गन्ने की फसल पानी डूबी हुई है। पशुओं के समक्ष हरे चारे का संकट है।
राप्ती नदी के तटवर्ती गांव कोल्हुइया भोजपुर, फत्तेजोत, लालनगर बिरदाभारी व चौका कला समेत करीब 15 गांव राप्ती नदी की कटान की चपेट में हैं। गांव में कीचड़ व गंदगी के चलते संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जलनिकासी की व्यवस्था कराने व संक्रामक रोगों पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है।
इस संबंध में एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्रों में जलनिकासी तथा संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय करने का निर्देश संबंधित विभागों को दिया गया है।