बलरामपुर। अक्तूबर में आई बाढ़ ने जिले के 50 हजार गन्ना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बाढ़ का पानी खेतों में भरा होने के कारण 30 से 40 प्रतिशत क्षेत्रफल में शरदकालीन गन्ने की बुआई ही नहीं हो सकी। ऐसे में अब उपज पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। वहीं, गन्ना किसानों की समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें।
जिले में कुल एक लाख 77 हजार 920 गन्ना किसान हैं। वर्ष 2021-22 में 96,121 हेक्टेअर में गन्ने की बुआई हुई थी। इसी बीच अक्तूबर में बाढ़ ने कहर बरपा दिया। इससे खेतीबाड़ी चौपट हो गई। चार हजार हेक्टेअर गन्ने की फसल पानी में डूबने से बर्बाद हो गई। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों के सामने खड़ी हो गई, जो शरदकालीन गन्ने की बुआई से आस लगाए थे। खेतों में पानी भरने के कारण 30 से 40 प्रतिशत क्षेत्रफल में गन्ने की बुआई ही नहीं हो सकी। गन्ना किसान राम किशोर व लखन का कहना है कि खेत खाली पड़े हैं। न तो गन्ने की बुआई कर सके और न ही अन्य खेती हो पा रही है।
बजाज चीनी मिल ने गत पेराई सत्र में 23 फरवरी 2022 तक एक अरब नौ करोड़ 79 लाख रुपये का गन्ना खरीदा था। इसमें से 22 जनवरी तक का 72 करोड़ 11 लाख 67 हजार रुपये का भुगतान किया गया। नया पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी अभी तक पिछले साल का 37 करोड़ 67 लाख रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान बकाया है। इससे भी किसान परेशान हैं।
जिला गन्ना अधिकारी आरएस कुशवाहा ने बताया कि बाढ़ के चलते शरदकालीन गन्ना की बुआई प्रभावित हुई है। जो किसान खेत में पानी भरा होने के कारण गन्ने की बुआई नहीं कर पाए उनसे फरवरी माह में गन्ना बुआई कराने का प्रयास किया जाएगा। बजाज चीनी मिल से किसानों के बकाया मूल्य का जल्द ही शत-प्रतिशत भुगतान कराया जाएगा।