महराजगंज तराई (बलरामपुर)। पहाड़ी नालों के कारण आई बाढ़ ने क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक सड़कों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। कई सड़कों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। सड़क की जगह अब तालाब या बड़े-बड़े गड्ढे ही नजर आ रहे हैं। सड़कें कटने से करीब 50 हजार लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन सड़कों पर एंबुलेंस न पहुंच पाने के कारण तीमारदार मरीजों को कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि खरझार, नकटी व धौबेेनिया पहाड़ी नालों में बाढ़ आने से प्रत्येक वर्ष क्षेत्र में भीषण तबाही मचती है। इसी तरह विगत दिनों इन पहाड़ी नालों से आई बाढ़ के कारण महराजगंज-लोहेपनिया, शांतिपुरवा-रामगढ़ मैटहवा, लहेरी-विजयीडीह, जुगली-फिरोजपुर, महराजगंज-दांदव आदि को जाने वाली सड़क पूरी तरह से तबाह हो गई है। बाढ़ के कारण इन सड़कों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। सड़क की जगह बड़े-बड़े गड्ढे तालाब का रूप ले चुके हैं।
सड़कें कटने के कारण रामगढ़ मैटहवा, शांतिपुरवा, लोहेपनिया, दांदव, लालबोझी, फिरोजपुर, सुगानगर लहेरी, औरहिया, बल्दीडीह, हरिहरनगर, पाटेश्वरीनगर, जगरामपुरवा, विजयीडीह, साहेबनगर, सहबीनिया, महादेव गोसाई, पूरेछीटन, मिर्जापुर, बरगदही, रामस्वरूपपुरवा सहित करीब दो दर्जन गांवों की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। इन क्षेत्रों के करीब 50 हजार लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
रामगढ़ मैटहवा निवासी पवन कुमार, शांतिपुरवा निवासी कुन्ने, सुगानगर निवासी प्रधाने यादव व जगरामपुरवा निवासी जय प्रकाश आदि का कहना है कि सड़कें कट जाने से आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। गांवों से तहसील मुख्यालय अथवा जिला मुख्यालय पहुंचने के सभी रास्ते बाढ़ के पानी में तबाह हो गए हैं। वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गांवों तक एंबुलेंस न पहुंच पाने के कारण मरीजों को कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों का आकलन लोक निर्माण विभाग से कराया जा रहा है। शीघ्र ही बजट की डिमांड कर क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।