बलरामपुर। राप्ती नदी व 17 पहाड़ी नालों के बाढ़ से 40 गांव टापू बन गए है। बाढ़ प्रभावित गांवों का एक दूसरे से संपर्क कट चुका है। जिले के दो तहसीलों में बाढ़ का कहर है। बाढ़ के चलते लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
लोगों ने प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों के लिए इंतजाम न कराने का आरोप लगाया है। नेपाल से पानी छोड़े जाने के चलते डीएम कृष्णा करुणेश ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के तटवर्ती इलाकों में पीड़ितों की मदद करने के लिए डीएम ने प्रशासन की टीमें तैयार की हैं।
शुक्रवार की शाम को भारी बारिश व नेपाल से पानी छोड़े जाने के चलते राप्ती नदी का जलस्तर 103.830 मीटर हो गया जो चेतावनी बिंदु से 21 सेंटीमीटर ऊपर है। 103.620 मीटर की तुलना में नदी का जलस्तर 103.830 मीटर नापा गया है।
स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के चलते राप्ती में बाढ़ आने की संभावना काफी प्रबल हो गई है। मौसम विभाग की तरफ से भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अंकित तिवारी ने 12 जुलाई तक भारी बारिश होने की बात बताई है और किसानों को फसल वाले खेतों में पानी के बहाव का इंतजाम करने की अपील की है।
इसके साथ ही जिले के धोबेनिया, हेंगहा, खरझार, बूढ़ी राप्ती, गौरिया, जमधरा व फोहरी सहित सभी 17 पहाड़ी नालों में बाढ़ के चलते सदर व तुलसीपुर तहसील के 40 से अधिक गांव टापू बन चुके है। महराजगंज तराई संवादसूत्र के अनुसार खरझार पहाड़ी नाले में बाढ़ के चलते 18 से अधिक गांव जलमग्न हो गए है।
महराजगंज तराई के अस्पताल में भी बाढ़ का पानी भर गया है। शांतिनगर, रामगढ़ मैटहवा, साहेबनगर, विजयीडीह, लहेरी, औरहिया, हरिजनपुरवा, जगरामपुरवा, हरिहरनगर, दांदव, सुगानगर, बल्दीडीह, लालबोझी सहित 18 गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से टापू बन चुके है। क्षेत्रवासी कुडे, सद्दाम, पवन कुमार, तुलराम व ह्रदयराम आदि ने बताया कि उनके घर में पानी भर जाने से सारा सामान बर्बाद हो गया है। भोजन पकाने के लिए जगह नहीं बचा है।
बलरामपुर- महराजगंज मार्ग, महराजगंज-ललिया, महराजगंज-महादेव गोसाई मार्ग, कौवापुर बाजार-रमईडीह मोड़ आदि मार्गो पर बाढ़ का पानी भर जाने से आवागमन ठप हो चुका है। कौवापुर रेलवे स्टेशन भी बाढ़ के पानी में टापू बन गया है। महराजगंज तराई के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पानी भर गया है। डॉ. सुहेल खां ने बताया कि नहर का पानी भर जाने के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हरैया सतघरवा में कई पहाड़ी नालों में आए बाढ़ के चलते शिवपुरा बाजार व एक दर्जन से अधिक गांव टापू हो चुके है। लोग परिवार के साथ सड़क पर रात काटने को मजबूर है। मजगवां के मुख्य मार्ग पर बनी पुलिया भी पहाड़ी नालों के बाढ़ में बह गई है।
भड़सहिया गांव का मुख्य मार्ग पहाड़ी नालों के तेज बहाव में बह गया है जिससे ग्रामीणों का आवागमन बंद हो गया है। मौके पर पहुंचकर बीडीओ सागर सिंह ने समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। भड़सहिया गांव की सड़क गांव के बीच में बाढ़ के पानी में नाला बना दिया है। देवीपाटन संवादसूत्र के अनुसार लगातार भारी बारिश के चलते तुलसीपुर तहसील क्षेत्र के सभी छोटे व बड़े पहाड़ी नाले उफान पर है।
तुलसीपुर तहसील के 24 से अधिक गांव पहाड़ी नालों के बाढ़ से टापू बन चुके है। ककरहवा पहाड़ी नाले में उफान व तेज बहाव में अमरहवाकला, अमरहवा खुर्द, ठाकुरपुर, मुसहवा, खैरी व विशुनपुर सहित दो दर्जन गांवों के चारों तरफ पानी भर गया है। काली प्रसाद, अरविंद शुक्ल, राज कुमार, कपिलदेव व मंगल आदि ने बताया कि चारों तरफ बाढ़ का पानी होने से आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भर जाने से अरहर, मकई व उड़द आदि फसलों को भारी नुकसान हुआ है।