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व्यवसायिक फूलों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

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बलरामपुर। प्राचीन काल से ही फूलों का मानव जीवन से अटूट संबंध रहा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी संस्कारों तथा उत्सवों में फूलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सभी धर्म, जाति, वर्ग व क्षेत्र विशेष के उत्सवों, विवाह व त्यौहारों में फूलों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में फूलों की खेती करके किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
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यह बातें जिला उद्यान अधिकारी लाल बहादुर मौर्य ने रविवार को जिला मुख्यालय पर कृषक गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि रंग-बिरंगे सुगंधित फूल जीवन में सुखद वातावरण का निर्माण करके प्रेरणा, स्फूर्ति तथा सृजनात्मक प्रवृत्तियों का विकास करते है।
एक समय था जब फूलों की खेती करना तो दूर इसकी कल्पना भी नहीं की जाती थी। समय के बदलाव के साथ-साथ परिस्थितियां भी बदली और लोगों ने फूलों को उगाना शुरु कर दिया। फूलों की अहमियत बढ़ने के कारण पिछले कुछ वर्षों से फूलों की खेती का व्यवसायीकरण किया गया।
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आज भारत में तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फूलों की खेती की जा रही है। खुले खेत के साथ-साथ ग्रीन हाउस में भी फूलों का उत्पादन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में गुलाब, गुलदाउदी, क्रोसेंड्रा, गोम्फरेना, कमल, कनेर तथा चायना एस्टर फूल की खेती खुले वातावरण में की जा रही है।
जिले के किसान भी इन फूलों की खेती करें और अपनी आय बढ़ाएं। फूलों की खेती के लिए जो भी जानकारी लेनी हो किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से प्राप्त कर सकते है।
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