बलरामपुर। गत सोमवार को मोहल्ला गदुरहवा में हुए विस्फोट से तबाह हुए अकरम के पड़ोसियों की जिंदगी ही बदल गई है। करीब पांच-छह परिवार के सिर की छत भी धमाके में उड़ गई है। इसके अलावा 24 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ये लोग खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। इन परिवारों के भोजन-पानी की व्यवस्था भी इनके रिश्तेदार व मित्र कर रहे हैं। घटना के तीन दिन बाद भी इन परिवारों तक कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची है। बुधवार को अमर उजाला टीम ने इस परिवार का हाल देखा तो पीड़ितों ने अपना दर्द कुछ इस तरह से बयां किया। पेश है रिपोर्ट-
पड़ोसी की गलती की भेंट चढ़ा आशियाना
केस-1- अकरम की पड़ोसी गुड़िया का आशियाना विस्फोट में तबाह हो गया है। गुड़िया का कहना है कि परिवार ने तिनका-तिनका जोड़कर आशियाना बनाया था। वह भी पड़ोसी की गलती की भेंट चढ़ गया। मोहल्ले व रिश्तेदारों के रहमोकरम पर जीना पड़ रहा है।
प्रशासन ने नहीं की कोई मदद
केस-2-शमशुल कमर का कहना है कि कोरोना ने पहले से ही धंधा पानी चौपट कर रखा था। अब इस विस्फोट ने परिवार की छत भी छीन ली। मुश्किल के इस दौर में छत व रोटी के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। प्रशासन ने अभी कोई मदद नहीं की है।
खुले आसमान के नीचे रहने को विवश
केस-3-सुगरा का परिवार भी धमाके के बाद खुले आसमान के नीचे रहने को विवश है। धमाके के बाद घर के साथ-साथ गृहस्थी का सारा सामान भी तहस नहस हो गया। रिश्तेदार व मोहल्ले वालों के रहमोकरम पर दिन काट रहे हैं। इन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
गली में रात गुजारने को विवश
केस-4
फहीमा बेगम का परिवार गली में रात गुजारने को विवश है। पूरा घर धमाके में तहस नहस हो गया। बेटे मजदूरी कर घर चलाते हैं। परिवार के सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं दिख रहा है। परिवार ने डीएम से सरकारी मदद दिलाने की गुहार लगाई है।
मिलेगी सहायता
नगर के गदुरहवा मोहल्ले में हुए धमाके के कारण जो नुकसान हुआ है उसका आंकलन क्षेत्रीय लेखपाल से कराया गया है। शीघ्र ही पीड़ितों को नियमानुसार सरकारी मदद दिलाई जाएगी। -डॉ. नागेन्द्र नाथ यादव, एसडीएम सदर