बलरामपुर। झारखंडी मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा व्यास ने राम कथा के महात्म्य पर प्रकाश डाला गया। कथा व्यास अंजली किशोरी ने कहा कि रामकथा के श्रवण मात्र से जीवन से जुड़े संकट स्वत: ही दूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान राम के चरित्र से यह सीखा जा सकता है कि जीवन की कठिनाइयों का कैसे सामना करना है। सलाह दी कि यदि भक्त रामकथा सुने तो उनके कष्ट खुद ही दूर हो जाते हैं। हर भक्त को चाहिए कि राम नाम का जप सदैव करते रहें। उन्होंने वीर हनुमान की भक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि हनुमान के हृदय में केवल राम और सीता के अलावा कुछ भी नहीं था।
कहा कि जब भगवान राम ने राज्याभिषेक के बाद हनुमान को मोतियों की माला भेंट की तो हनुमान माला के मोतियों को दांत से काट-काट कर उसमें राम की तलाश करने लगे। यह हनुमान की भक्ति की शक्ति ही थी, उन्होंने अपना सीना चीर कर दिखाया था कि उनके प्रभु राम हमेशा उनके हृदय में वास करते है। इसी लिए आज भी कहा जाता है कि भक्ति हो तो हनुमान जैसी।
कथा आयोजक विनय कुमार गिरि ने बताया कि कथा की समाप्ति पर श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।