बलरामपुर। विद्युत संविदा मजदूर संगठन ने मंगलवार को लंबित मांगों और संविदा कर्मियों के शोषण के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए संविदा कर्मियों ने सरकार और विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।
जिलाध्यक्ष विष्णु सिंह ने कहा कि संविदाकर्मी बिजली व्यवस्था की रीढ़ हैं। इसके बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उपाध्यक्ष देवेंद्र यादव और महामंत्री दयाशंकर ने कहा कि यदि सरकार और विभाग ने संविदा कर्मियों की मांगों की अनदेखी की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण की प्रक्रिया से वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों का भविष्य संकट में है। निजीकरण की आड़ में संविदा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है, जिसे संगठन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
प्रदर्शन के बाद संगठन ने अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही संविदा कर्मियों को न्यूनतम 22 हजार रुपये तथा लाइनमैन, एसएसओ और कंप्यूटर ऑपरेटर को 25 हजार रुपये मासिक वेतन देने, भुगतान सीधे विभाग द्वारा किए जाने, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः बहाल करने और छंटनी पर रोक लगाने की मांग भी की गई। इसके अलावा सेवा काल में मृत्यु होने पर आश्रितों को 20 लाख रुपये का बीमा कवर, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और ईपीएफ से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की मांग भी उठाई गई। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी अनिल कुमार श्रीवास्तव व सह संगठन मंत्री विवेक पांडेय आदि मौजूद रहे।