बलरामपुर। पिछले साल आई बाढ़ से तीन सौ से अधिक गांवों के लगभग 70 हजार हेक्टेयर धान की फसल नष्ट हो गई थी। जबकि इस वर्ष किसानों को सूखे की मार का डर सताने लगा है। वर्तमान में लगभग 65 प्रतिशत किसान धान की रोपाई कर चुके हैं। जबकि 35 प्रतिशत किसान रोपाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जुलाई माह तक 30 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है। किसान महंगी हो चुकी सिंचाई का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। मन मसोस कर किसान बारिश होने के इंतजार में आसमान की तरफ टकटकी लगाए देखते रहते हैं।
जिले के चार ब्लॉक क्षेत्र हार्ड एरिया के रूप में जाने जाते हैं। यहां सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यहां की खेती पूर्ण रूप से बारिश पर ही निर्भर है। किसानों की आजीविका का मुख्य साधन खेती ही है। उनके जीवन की हर गतिविधि इसी पर निर्भर है। जिले में किसान मुख्य रूप से दो फसलें उगाते हैं। खरीफ के सीजन में धान और रबी के सीजन में गेहूं की खेती की जाती है।
जिले में इस वर्ष एक लाख 13 हजार हेक्टेअर में धान, दो हजार 738 हेक्टेअर में मक्का, एक हजार 877 हेक्टेअर में उर्द, 11 हजार 160 हेक्टेअर में अरहर और 17 हेक्टेअर में तिल की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। खेती में संसाधन के नाम पर सिंचाई के लिए नहरें तो हैं लेकिन जरूरत के समय इनमें पानी नहीं रहता। गिने चुने क्षेत्र में ही ट्यूबवेल संचालित हैं।
मौजूदा समय में सूखे का आसार दिखने लगा है। जो किसान धान की रोपाई कर चुके हैं वे भी परेशान हैं और जो रोपाई नहीं किए हैं वे तो परेशान हैं ही।
नहरें सूखीं, नलकूप खराब
महराजगंज तराई, गैसड़ी, हरैया सतघरवा व तुलसीपुर में अधिकांश नहरें सूखीं पड़ीं हैं। बिजली के अभाव में नलकूल भी बंद पड़े हैं। रोपी गईं धान के खेत में दरारें पड़ने लगीं है। किसान राजा गौतम, राज बहादुर, विनय कुमार, सरताज मोहम्मद, इजहारुल हसन व मोहित देव आदि का कहना है कि धान की बोआई तो हो गई है लेकिन खेत में पानी न भरने के कारण पत्तियां पीली पड़ने लगीं हैं। खेत में सिंचाई के लिए बारिश ही एक मात्र सहारा है। बारिश न हुई तो फसलें खराब हो जाएंगी।
कराया जाएगा सर्वे
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सियाराम कनौजिया का कहना है कि जिले में औसत से कम बारिश हुई है। 10 अगस्त तक पर्याप्त बारिश होने पर फसलों को नुकसान नहीं होगा। तय सीमा तक पर्याप्त बारिश न होने पर सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में फसल खराब होने पर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।