बलरामपुर के जिला संयुक्त अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
बलरामपुर। गर्मी बढ़ी है, मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इलाज कहां कराएं, अस्पताल में चिकित्सक ही नहीं बैठते हैं। ऐसा तब है जब शासन ने बीते वर्ष 10 चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने में आरोप पत्र दिया था। जांच खुफिया एजेंसियों ने की थी और चौंकाने वाली बात सामने आई। इसके बाद तीन चिकित्सकों पर फिर शासन ने कार्रवाई की। इसके बाद जिलाधिकारी ने 12 मई को संयुक्त जिला चिकित्सालय में जांच की, जिसमें छह चिकित्सक समेत 12 स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर नहीं मिले। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है।
सरकारी अस्पताल में समय से ओपीडी करने के बजाय चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस को तरजीह दे रहे हैं। ओपीडी में देर से आना जल्दी जाना चिकित्सकों की कार्यशैली बन गई है। कहने तो सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी रहती है, लेकिन चिकित्सक 10 बजे के बाद ही पहुंचते हैं। समय से चिकित्सकों के न बैठने पर मरीजों को परेशान होना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में रोज ही ऐसा नजारा देखने को मिलता है। चिकित्सक सुबह-शाम प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। ओपीडी में मरीज इंतजार करते रहते हैं। मंगलवार को भी संयुक्त में सेखुईकला से आए राम मिलन इलाज कराने के लिए चिकित्सक का इंतजार करते रहे। वहीं मालती को भी महिला चिकित्सक का इंतजार था। मरीजों ने बताया कि चिकित्सक समय से नहीं आते हैं।
महिला अस्पताल में भी नदारद रहते हैं चिकित्सक
जिला महिला अस्पताल में भी नियमित चिकित्सक समय से ओपीडी में नहीं बैठते हैं। ओपीडी संविदा चिकित्सकों के भरोसे रहता है। विशेषज्ञ चिकित्सक धड़ल्ले से नर्सिंग होम व क्लीनिक में प्रैक्टिस कर रहे हैं। सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की आस में आने वाले मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
उप मुख्यमंत्री के रडार पर आ चुके हैं चिकित्सक
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ व स्त्री रोग विशेषज्ञ और संयुक्त जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक की रडार पर आ चुके हैं। पिछले वर्ष उप मुख्यमंत्री की गोपनीय जांच में तीनों चिकित्सक एनपीएस लेने के बाद भी प्राइवेट प्रैक्टिस में संलिप्त पाए गए थे। उप मुख्यमंत्री ने जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि अभी तक उस मामले की जांच ही चल रही है।
जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अस्पताल में निर्धारित समय पर चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण करके लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।