देवीपाटन में सजा मां पाटेश्वरी का दरबार ।- संवाद
तुलसीपुर। नगर से सटा सिद्ध शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां की विशेषताएं इसे अद्वितीय बनाती हैं। गर्भगृह में पाताल तक जाने वाली प्राचीन सुरंग है, जिसके ऊपर चांदी का चबूतरा विद्यमान है। मंदिर में त्रेता युग से अखंड धूनी निरंतर जल रही है, जिसकी भस्म को भक्त प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं।
गर्भगृह में स्थित अखंड ज्योति भी मंदिर की विशेष पहचान है। इसका काजल श्रद्धालु अपनी आंखों में लगाकर पुण्य की प्राप्ति मानते हैं। मंदिर परिसर स्थित सूर्यकुंड में स्नान करने से चर्म रोग ठीक होने की मान्यता है। यही कारण है कि यहां नवरात्र पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी ने बताया कि शारदीय नवरात्र में मंदिर प्रशासन द्वारा बिजली, पानी और सफाई की विशेष व्यवस्था की जाती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं।
मंदिर का इतिहास
वीपाटन मंदिर का जीर्णोद्धार गुरु गोरक्षनाथ ने कराया था। यह बात देवीपाटन मंदिर के महात्मा नामक पुस्तक में उल्लिखित है। कहा जाता है कि जब देवी सती ने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ कुंड में कूदकर शरीर का त्याग कर दिया था, तब क्रोधित महादेव मोहवश सती के शव को अपने कंधे पर लेकर तीनों लोकों का भ्रमण करने लगे थे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव को खंडित कर दिया था। जहां-जहां सती के लिए अंग गिरे वह सिद्ध शक्तिपीठ कहलाए। यहां पर सती का बांया कंधा वस्त्र सहित गिरा था। इसलिए यह भी सिद्ध शक्तिपीठ कहलाया।
कैसे पहुंचें देवीपाटन मंदिर
-बलरामपुर जिला मुख्यालय से दूरी : 27 किमी
-भारत-नेपाल सीमा से दूरी : 18 किमी
-रेल मार्ग : बलरामपुर और तुलसीपुर रेलवे स्टेशन से सीधी पहुंच
- बस मार्ग: बलरामपुर से तुलसीपुर होते हुए नियमित बस सेवा उपलब्ध
- लखनऊ से बलरामपुर की दूरी लगभग 170 किमी है। लखनऊ से ट्रेन व बस सेवा उपलब्ध है। सड़क मार्ग से गोंडा होकर बलरामपुर पहुंचा जा सकता है। वहां से 27 किमी दूरी पर तुलसीपुर स्थित देवीपाटन मंदिर पहुंचा जा सकता है।