गोंडा। आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज कराने का दावा किया जा रहा है। लेकिन लाभार्थियों के बीमार पड़ने पर गोल्डन कार्ड किसी काम के नहीं आ रहे। किसी के नाम में त्रुटि है, तो कोई परिवार के सदस्यों के नाम में गलती के कारण मुफ्त इलाज से वंचित हो जा रहा है। इसको लेकर सीएमओ कार्यालय पर एक अगस्त से 24 अगस्त तक 288 शिकायतें आईं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग संशोधन का विकल्प न होने की बाद कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
जिले में दो लाख 82 हजार 857 परिवारों के 12 लाख दो हजार 154 लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया है। चार लाख 41 हजार लोगों का गोल्डन कार्ड बनाया गया है। लेकिन इनमें से करीब आठ हजार लाभार्थियों का नाम, जन्मतिथि या माता-पिता का नाम गलत है।
सीएमओ कार्यालय पर शुक्रवार को शिकायत दर्ज कराने पहुंची पलक को ऑपरेशन कराना था। गोल्डन कार्ड में लाभार्थी का नाम फलक लिखा है। जिसके कारण पैनल से जुड़े एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद मुफ्त इलाज नहीं हो सका। इटियाथोक के मजहबी के नाम के स्थान पर कार्ड में महजबी लिखा है। जिससे कार्ड से उपचार नहीं हो सका। इसी प्रकार निबरा, जरीना, उर्मिला, पिंटू सहित 288 लोग पिछले 24 दिन में सीएमओ कार्यालय स्थित शिकायत निवारण पटल पर पहुंचे। इनकी शिकायत तो दर्ज कर ली गई लेकिन कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
आयुष्मान भारत योजना की सूची या गोल्डन कार्ड में अंकित नाम के संशोधन का कोई विकल्प नहीं दिया गया है। इस संदर्भ में कई बार योजना से जुड़े उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया। लाभार्थियों की शिकायत दर्ज कर सीएमओ व जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा।
- शिवांशु मिश्र, जिला शिकायत निवारण प्रबंधक