बलरामपुर। पहाड़ी नाले की बाढ़ से सैकड़ों किसानों की किस्मत पर रेत पड़ गई है। हजारों बीघे धान व गन्ने की फसल बालू के नीचे दब गई है। पूरा इलाका रेगिस्तान नजर आ रहा है। यह अनहोनी अवैध खनन के दौरान बनाए गए रास्ते की वजह से हुई है। इस रास्ते ने नाले की धारा ही बदल दी है। किसान लाचार हैं और प्रशासन मौन साधे हुए है। इन किसानों का परिवार किस तरह जीवन यापन करेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
विदित हो कि महराजगंज तराई थाना क्षेत्र में बारिश के वक्त हर साल पहाड़ी नाले खरझार में उफान आता रहता है। नाले में भारी मात्रा में रेत भी पहाड़ों से पानी में बहकर आती है। इस साल खरझार नाले में जून व जुलाई में आए उफान से रामगढ़ मैटहवा व शांतिपुरवा के किसानों की करीब एक हजार बीघे गन्ने व धान की फसल नाले की रेत में नीचे दब गई है। किसान राम किशोर, सहजराम, फतेह बहादुर, भगवाने, कल्लू व ननकुन आदि ने बताया कि फसल बर्बाद होने से उनके परिवार के समक्ष रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। इन लोगों ने डीएम से नाले के बाढ़ की तबाही रोकने का ठोस उपाय किए जाने व उचित मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
बालू का अवैध खनन है तबाही का कारण
किसान राम अवतार, शिव कुमार, चिनके व मेहताब खां आदि का कहना है कि नाले में बीते दिनों हुए अवैध खनन ने नाले की धारा ही बदल दी है। अब खरझार नाला रामगढ़ मैटहवा व शांतिपुरवा गांव की तरफ बह रहा है। खनन माफिया जिस रास्ते से बालू भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ले जाते थे अब उसी रास्ते से नाला बह रहा है। गांव का संपर्क मार्ग भी रेत के नीचे दब गया है।
पहली ही बाढ़ में बहा 55 लाख का बांध
खरझार पाहाड़ी नाले की बाढ़ से लैबुड्डी गांव को बचाने के लिए गत वर्ष 55 लाख रुपये की लागत से बनाया गया बांध इस साल जून में आए पहले ही उफान में बह गया है। लोगों का कहना है कि मानक व गुणवत्ता की अनदेखी कर बनाया गया यह बांध महज सरकारी धन बर्बादी थी। इन लोगों ने बाढ़ की तबाही रोकने के लिए शासन-प्रशासन से पुख्ता इंतजाम किए जाने की मांग की है।
मिलेगा मुआवजा
बाढ़ की रेत से तबाह हुई फसलों का आंकलन कराया जा रहा है। प्रभावित किसानों को कृषि निवेश अनुदान योजना के तहत उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।
- कृष्णा करुणेश, डीएम बलरामपुर