बलरामपुर। यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर भी कोरोना वायरस का ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। शिक्षक नेताओं ने मूल्यांकन की तिथि 16 मार्च से बढ़ाकर 23 मार्च किए जाने की मांग की है। अब देखना यह है कि शासन व प्रशासन इस समस्या को किस तरह निस्तारित करता है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ला तथा मंत्री अशोक पांडेय ने बताया कि संघ के प्रदेश नेतृत्व ने कोरोना महामारी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह कहा है कि प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान 22 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में 16 मार्च से सभी जिला मुख्यालयों पर शुरु हो रहे यूपी बोर्ड उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन का काम भी शिक्षक हित में 22 मार्च तक स्थगित कर देना चाहिए। यह भी कहा गया है कि कोरोना का रोगी लखनऊ में भी पाया गया है ऐसे में शिक्षकों के जीवन से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
शिक्षक मूल्यांकन केन्द्र के एक कक्ष में 50 से 100 की संख्या में बैठकर सुबह से देर शाम तक परीक्षण का काम करते हैं। केन्द्रों की सफाई व प्रसाधन आदि की व्यवस्था भी कमोवेश खराब ही रहती है। सरकार को शिक्षकों के जीवन का महत्व देखते हुए मूल्यांकन कार्य 23 मार्च से कराना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो शिक्षक आंदोलन व मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।
कोरोना को देखते हुए मूल्यांकन केन्द्रों पर होगी यह व्यवस्था
बलरामपुर। सोमवार से शुरु हो रहे यूपी बोर्ड उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन कार्य में कोरोना का भय न रहे इसके लिए सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कुछ गाइड लाइन तय की है। इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक को दी गई है।
-मूल्यांकन कक्ष में दो परीक्षक के बीच न्यूनतम एक मीटर की दूरी होगी।
-मूल्याकंन केन्द्र पर हमेशा शुद्घ पेयजल की व्यवस्था।
-शौचालयों की नियमित साफ सफाई के निर्देश।
-परीक्षकों की कुर्सियों, मेजों तथा कमरों के खिड़की दरवाजे की नियमित साफ सफाई।
-परीक्षक के हाथ धोने के लिए साबुन तथा सेनेटाइजर की व्यवस्था।
-परीक्षकों के उपचार की व्यवस्था।
-पीड़ित परीक्षकों व कर्मियों को कार्य से विरत रखने की व्यवस्था।
-मूल्यांकन केन्द्र में परीक्षकों व कर्मियों के अलावा अन्य किसी बाहरी को प्रवेश न देने का निर्देश
नोट:-जिला विद्यालय निरीक्षक एमके कनौजिया ने बताया कि परिषद से मिले निर्देशों का पूर्णतया पालन कराया जाएगा।