बलरामपुर में लगी सरसों की फसल।-संवाद
बलरामपुर/हरैया सतघरवा। जिले में सोमवार सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। सुबह से आसमान में बदली छाई रही और कई इलाकों में हल्की धुंध भी दिखाई दी। मौसम में आए इस बदलाव से किसानों में फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता देखने को मिली।
किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं, सरसों और दलहन की फसल पकने की अवस्था में है। ऐसे में लगातार बदली और धुंध रहने से फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ किसानों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और बारिश न हुई तो फसलों को अधिक नुकसान नहीं होगा। ग्राम गुगौलीकला निवासी किसान स्वामीनाथ वर्मा ने बताया कि गेहूं की फसल में अब बालियां आ चुकी हैं। ऐसे में अगर धूप कम निकलेगी और लगातार नमी बनी रही तो फसल में रोग लगने की संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि मौसम पर नजर बनाए हुए हैं।
ग्राम सिसहनिया निवासी अशोक द्विवेदी ने कहा कि सुबह धुंध और बदली रहने से खेतों में नमी बनी हुई है, जो कुछ हद तक फसलों के लिए लाभकारी भी हो सकती है। लेकिन अगर मौसम ज्यादा दिनों तक ऐसा ही बना रहा तो कटाई के समय परेशानी हो सकती है। ग्राम कुकुरभुकवा निवासी किसान स्त्रोत कुमार ने बताया कि सरसों की फसल पक कर तैयार है। ऐसे में अगर तेज हवा या बारिश होती है तो दाना झड़ सकता है। इसलिए मौसम के बदलते रुख को लेकर हम सभी चिंतित हैं।
माहू कीट और फफूंद का बढ़ सकता है प्रकोप
कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा के कृषि वैज्ञानिक सियाराम कन्नौजिया ने बताया कि तेज हवा एवं ओलावृष्टि न हो तो गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। बरसात होने से फसल को लाभ मिलेगा। लगातार बदली व धुंध होने से आलू, चना, मसूर व सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। आम की फसल में पावडी मिल्ड्यू (फंफूदी) रोग हो सकता है। आलू व सरसों की फसल को माहू कीट से बचाने के लिए एक मिली लीटर इमिडा नामक दवा तीन लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर फसल में छिड़काव करना चाहिए। इसी तरह आम की फसल को पावडी मिल्ड्यू रोग से बचाने के लिए एक लीटर पानी में दो ग्राम घुलनशील गंधक का घोल बनाकर आम के पेड़ पर छिड़काव करना लाभदायक होगा।