बलरामपुर। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) के तहत एफआरयू सेंटर पर गर्भवती के सिजेरियन की सुविधा जनपद में दम तोड़ती नजर आ रही है। जिले के तीन एफआरयू सेंटर पर मार्च महीने में अब तक एक भी सिजेरियन नहीं हुआ। सर्जन व बेहोशी के डॉक्टर बुलाने व दवा आदि के झंझट से बचने के लिए सीएचसी अधीक्षक जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर रहे हैं। इसके चलते जिला अस्पतालों में सिजेरियन का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।
जिले में कुल नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन सभी में ऑपरेशन थियेटर है। मरीजों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी तुलसीपुर, उतरौला व पचपेड़वा को फस्ट रेफरल यूनिट (प्रथम रेफरल यूनिट) के रूप में उच्चीकृत किया है मगर मार्च में एफआरयू पर भी गर्भवती को सिजेरियन की सुविधा नहीं मिल पर रही है। जबकि जिला महिला अस्पताल का सिजेरियन वार्ड फुल चल रहा है।
जिला महिला अस्पताल व संयुक्त जिला चिकित्सालय में एक से 19 मार्च तक 90 से अधिक सिजेरियन हुए हैं। 78 गर्भवती को महिला अस्पताल व 12 से अधिक को संयुक्त जिला चिकित्सालय में यह सुविधा मिली है।
सीएचसी उतरौला, तुलसीपुर व पचपेड़वा के अधीक्षक बताते हैं कि सिजेरियन के लिए निश्चेतक डॉक्टर को महिला अस्पताल से बुलाना पड़ता है। ऐसे में प्री-प्लांड करके व निश्चेतक से समय लेकर ही एफआरयू पर सिजेरियन कराया जाता है। इसी के चलते प्रसव पीड़ा से कराहते हुए अस्तपाल पहुंचने वाली गर्भवती को मजबूरन जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि एफआरयू पर मार्च में अब तक कोई सिजेरियन न होने की जानकारी नहीं है। इसकी रिपोर्ट 20 तारीख के बाद आएगी। एफआरयू के अधीक्षकों से वार्ता करके अस्पताल आने वाली जटिल गर्भावस्था वाली गर्भवती का वहीं पर सिजेरियन सुनिश्चित किया जाएगा।