जरवा। इलाके के कई गांवों के किसान सूखी पड़ीं नहरें देखकर परेशान हैं। चित्तौड़गढ़ बांध निर्माण खंड के बघेलखंड जलाशय की नहर के कट जाने से यहां पिछले 15 वर्ष से पानी नहीं मिल पा रहा है। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कदम उठाया गया है। आक्रोशित किसानों ने सोमवार को जिलाधिकारी से नहर को बंधवाने और पेरा नाले में बह रहे पानी को बंद कराकर सिंचाई के लिए पानी दिलाने की मांग की है।
इससे मकुनहवा, सोनपुर, धुतकहवा और नवानगर गांव के लगभग छह हजार किसान प्रभावित हैं। इन गांवों के किसानों राजाबाबू सिंह, रामदीन, जगदीश, बेला प्रसाद, हनुमान, सागर, मुस्तकीम, अजीज, रफीक आदि ने बताया कि 15 वर्ष पहले नवानगर के पास नहर की कटान हो गई थी। इससे सारा पानी पास के पेरा नाले में चला जाता है। इस कारण किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा। जबकि सिंचाई विभाग प्रत्येक वर्ष रोटावेटर व जेसीबी मशीन से नहर की सफाई कराता है। किंतु नहर की कटान को रोकने का कोई उपाय नहीं करता। - संवाद
प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भी भेज चुके हैं पत्र
किसानों ने बताया कि हम लोग सिंचाई के लिए गांव से दूर बह रहे नाले में मशीन लगाकर एक किलोमीटर तक प्लास्टिक पाइप से जोड़कर खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाते हैं। इस कार्य में अधिक पैसे व समय लगता है। किसानों ने कहा कि प्रत्येक वर्ष हम लोग नहर को सही करवाने के पत्र नहर विभाग के उच्च अधिकारियों को देते हैं। इस बारे में मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को भी पत्र भेज चुके हैं। लेकिन अभी तक नहर की मरम्मत नहीं हुई।
प्रस्ताव भेजा है, बजट आने का इंतजार
विभाग के जेई राहुल वर्मा ने बताया कि इस बारे में परियोजना का प्रस्ताव भेजा गया है, बजट आने पर काम कराया जाएगा। एसडीओ इमरान आलम ने बताया कि शीघ्र ही जेई राहुल वर्मा व अन्य के साथ मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा। नव निर्माण के लिए परियोजना का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। बजट आने पर पक्का बांध बंधाकर बहाव ठीक करा दिया जाएगा।