बलरामपुर। मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष अभियान चलाएगा। इस अभियान के तहत जिले की 793 ग्राम पंचायत व पांच नगर निकायों में उच्च जोखिम युक्त (एचआरपी) गर्भवती की पहचान कर उनकी विशेष देखभाल की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक गर्भवती की गर्भावस्था के तीन महीने के अंदर हर हाल में पंजीकरण कराया जाएगा।
ग्राम पंचायतों में गर्भवती की समय से पहचान न होने के कारण टीकाकरण व अन्य स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती है। इस कारण उच्च जोखिम युक्त गर्भवती की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर आयोजित जांच में शिविर में उच्च जोखिम युक्त गर्भवती की पहचान हो पाती है। तब कहीं उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल पाती है। प्रत्येक पीएमएसएमए दिवस पर 300 से अधिक उच्च जोखिम युक्त गर्भवती चिह्नित की जाती हैं। उच्च जोखिम युक्त गर्भवती की देर से पहचान होने पर कभी-कभी प्रसव के दौरान खतरा भी बढ़ जाता है। मातृ-शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण साबित होगा।
एचआरपी गर्भवती की संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित होंगी आशा
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उच्च जोखिम युक्त गर्भवती को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर आयोजित जांच शिविर में लाने के लिए 100 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा उच्च जोखिम युक्त गर्भवती एफआरयू वाले अस्पताल में संस्थागत प्रसव कराने पर 500 रुपये का प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा। प्रसव के बाद यदि प्रसूता को कोई दिक्कत होती है तो उसकी जांच कराने पर भी आशा को 300 रुपये अलग से दिए जाएंगे।