बलरामपुर। भैंस चोरी के मामले में शुक्रवार को 35 साल बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम मंजुला मिश्रा ने भैंस चोर को एक वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर एक हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
ललिया थाने के फुलहिया गांव निवासी स्वामी दयाल ने 28 मई 1988 को मुकदमा दर्ज कराया था। कहा था कि उसकी और गांव के ही अनोखी लाल व शांति की एक-एक भैंस को कुछ लोग खोलकर ले जा रहे थे। ग्रामीणों ने घेराबंदी की तो तीन लोग भैंस छोड़कर भाग गए। ग्रामीणों ने मौके से श्याम मनोहर को पकड़ लिया।
पुलिस ने विवेचना की और कोड़ही निवासी श्याम मनोहर के साथ ही तीन अन्य के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक अभियोजन अधिकारी ने सात लोगों की न्यायालय में गवाही कराई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम मंजुला मिश्रा ने श्याम मनोहर को चोरी करने का दोषी मानते हुए एक वर्ष की कैद व एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मजिस्ट्रेट ने इस मामले में अन्य तीन अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।