बलरामपुर। जिला मेमोरियल जिला चिकित्सालय में चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की आपूर्ति के बकाया भुगतान की जांच में ऑर्थो ड्रिल मशीनों की खरीद का मामला सामने आया है। अस्पताल में चार मशीनों की आपूर्ति के बाद संबंधित फर्म ने जेम पोर्टल पर प्रति मशीन 32 हजार रुपये की दर से कुल 1.28 लाख रुपये का बिल प्रस्तुत किया था। अस्पताल प्रशासन के आकलन में यह दर बाजार भाव से करीब चार गुना अधिक पाई गई। आपत्ति के बाद जेम पोर्टल पर प्रस्तुत बिल निरस्त कराया गया और संशोधित बिल के आधार पर चारों मशीनों के लिए कुल 39,412 रुपये का भुगतान किया गया।
देवीपाटन मंडल के अपर आयुक्त (द्वितीय) ने 21 सितंबर को मामले में जांच आख्या तलब की थी। इसके जवाब में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने 25 सितंबर को पत्र भेजकर खरीद, बिल और भुगतान की स्थिति स्पष्ट की।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2023-24 में अस्पताल की तत्कालीन आवश्यकता को देखते हुए मेसर्स आयुष इंटरप्राइजेज एंड जनरल आर्डर सप्लायर, रमचेरापुर नौबस्ता, गोंडा को चार ऑर्थो ड्रिल मशीनों की आपूर्ति का मौखिक आदेश दिया गया था। आपूर्ति के बाद फर्म के प्रोपराइटर सुनील पांडेय ने 28 मार्च 2024 को जेम पोर्टल के माध्यम से प्रति मशीन 32 हजार रुपये की दर से कुल 1.28 लाख रुपये का बिल प्रस्तुत किया।
अस्पताल प्रशासन ने बिल में दर्ज दर का आकलन कराया तो यह खुले बाजार की दर से करीब चार गुना अधिक पाई गई। इसके बाद फर्म से वार्ता कर जेम पोर्टल पर प्रस्तुत बिल निरस्त कराया गया। फर्म ने संशोधित दर के अनुसार 9,853 रुपये प्रति मशीन के हिसाब से दो-दो मशीनों के 19,706-19,706 रुपये के दो बिल प्रस्तुत किए। अस्पताल प्रशासन ने 29 मार्च 2024 को कोषागार के माध्यम से दोनों बिलों का भुगतान कर दिया। इस तरह प्रारंभिक बिल के मुकाबले चारों मशीनों के लिए 39,412 रुपये का भुगतान किया गया।
दवाओं और सामग्री का भुगतान बजट के अभाव में अटका
जांच में वित्तीय वर्ष 2024-25 में दवाओं और आवश्यक चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति से संबंधित लंबित देनदारी का मामला भी सामने आया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हीरालाल ने बताया कि अस्पताल के संचालन के लिए बजट मिलने की प्रत्याशा में विभिन्न फर्मों से आवश्यक सामग्री ली गई थी।
उन्होंने बताया कि संबंधित भुगतान के लिए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं और वित्त नियंत्रक, लखनऊ को अलग-अलग मदों में बजट आवंटित करने के लिए कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन बजट उपलब्ध नहीं हो सका। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की ओर से छह फरवरी को लंबित देयता से संबंधित बिलों का परीक्षण भी कराया जा चुका है।