फोटो-6-बलरामपुर में रेडिमेड कपड़े बेचतीं संचिता ।-संवाद
पिपरहवा चौराहा। पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद संकट में घिरी संचिता ने हिम्मत नहीं हारी। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल परिवार को संभाला, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की है।
ग्राम पंचायत भंगहा कला निवासी संचिता ने वर्ष 2023 में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर रेडीमेड कपड़ों और कॉस्मेटिक की दुकान शुरू की। बताया कि वर्ष 2022 में पति की अचानक मौत के बाद उनके सामने दो छोटे बच्चों रजत और गुड़िया के पालन-पोषण की बड़ी जिम्मेदारी आ गई थी। आय का कोई साधन न होने से परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। ऐसे मुश्किल समय में स्वयं सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ हौसला भी दिया। शुरुआती दौर में व्यापार में कठिनाइयां आईं, लेकिन संचिता ने मेहनत और धैर्य से अपनी दुकान को धीरे-धीरे स्थापित कर लिया। आज उनकी दुकान क्षेत्र में पहचान बना चुकी है। वर्तमान में संचिता को प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है, जिससे वह बच्चों की पढ़ाई-लिखाई सहित परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर रही हैं।
महिलाओं को स्वरोजगार की दे रही प्रेरणा
संचिता का कहना है कि स्वयं सहायता समूह उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास भी मिला है। अब वह अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।