बलरामपुर। इंसानियत की रक्षा करते हुए साथियों सहित शहीद होने वाले हजरत इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। मजलिसों का दौर शुरु हो गया है। अकीदतमंद या हुसैन की मातमी सदाओं के साथ हुसैन को याद कर रहे हैं। अकीदतमंदों ने अपनी क्षमता के मुताबिक इमाम हुसैन की ताजियादारी तेज कर दी है।
शहर मुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने बताया कि इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम माह से शुरू होता है। जालिम बादशाह यजीद ने 7वीं मोहर्रम के दिन से ही इमाम हुसैन व उनके साथियों का पानी बंद कर दिया था। इमाम हुसैन व उनके साथियों ने हार नहीं मानी। मोहर्रम की 10वीं तारीख तक यजीद के साथ जंग लड़ते हुए अपने साथियों के साथ शहादत दी थी।
गुजरात व मुंबई जाता है ताजिया
बलरामपुर में बनाए गए ताजिये गुजरात, कोलकाता व महराष्ट्र भी भेजे जाते हैं। ताजिया कारीगार वसीम, ताज मोहम्मद, इरफान व राजू आदि ने बताया कि गुजरात व महराष्ट्र के कई अकीदतमंद हर साल ताजिया बनाने का ऑर्डर देते हैं। हम लोग समय से ताजिया बनाकर वहां भिजवाते हैं। बाजार में 500 रुपये से लेकर चार लाख रुपये की लागत से ताजिया का निर्माण किया गया है। नगर का अलीजानपुरवा मोहल्ला ताजिया निर्माण के लिए काफी समय से मशहूर है।
7वीं मोहर्रम को हरवशपुर व अलीबाग में जुटेंगे अकीदतमंद
मोहर्रम माह की 7वीं तारीख को हरवशपुर गांव स्थित कर्बला पर इमाम हुसैन की याद में लगने वाले मेले में अकीदतमंदों की भारी भीड़ हर साल जुटती है। अकीदतमंद यहां सच्चे मन से जो भी मुराद मांगते हैं वह अवश्य पूरी होती है। यहां देश के कई हिस्सों से लोग आते हैं। तुलसीपुर रोड स्थित चुंगी नाका के पास स्थित अलीबाग में वारसी बाबा के मजार पर भी मेला लगता है।
- संवाद