बलरामपुर। मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा देने के लिए दस साल पहले शुरू हुआ चार अस्पतालों के भवन का निर्माण अबतक पूरा नहीं हो सका है। ढाई करोड़ का बजट खर्च होने के बाद भी भवन अधूरे हैं। देखरेख के अभाव में भवन बिना उपयोग के ही जर्जर हो रहे हैं। संचालन शुरू न होने से आसपास के ग्रामीणों को इलाज के लिए कई किलोमीटर दौड़कर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों का दर्द और भी बढ़ जाता है।
अल्पसंख्यक विभाग के मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसडीपी) के तहत वर्ष 2012-13 में चार अस्पतालों के भवन का निर्माण शुरू हुआ था। इसके तहत रेहरा बाजार व महदेइया में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पचपेड़वा क्षेत्र के मनकौरा भगवानपुर व तुलसीपुर के बनकटवा कला में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बनने का प्रस्ताव हुआ था। इसके निर्माण की जिम्मेदारी जलनिगम की संस्था कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) को दी गई थी। पहली किस्त मिलने पर कार्यदायी संस्था ने काम तो शुरू किया लेकिन निर्माण को बीच में ही अधूरा छोड़कर चली गई।
4.72 करोड़ से होना है निर्माण
चार अस्पतालों के भवन का निर्माण कराने में कुल 4.72 करोड़ रुपये का बजट खर्च होना है। इसमें एक सीएचसी के निर्माण पर एक करोड़ 87 लाख और एक पीएचसी के निर्माण पर 49 लाख रुपये का बजट निर्धारित है। निर्माण शुरू होने पर कुल बजट की आधी रकम दो करोड़ 36 लाख रुपये कार्यदायी संस्था को आवंटित भी कर दिया गया था।
मजबूरन झोलाछाप से कराना पड़ता है इलाज
रेहरा बजार निवासी जगराम व सरोज ने बताया कि अस्पताल का अधूरा भवन बिना प्रयोग के ही जर्जर हो रहा है। भवन पर काई जम गई है। प्लास्टर न होने से भवन की ईंटें टूटकर निकल रही हैं। प्रमोद, रंजीत व उर्मिला ने बताया कि आसपास कोई अस्पताल नहीं है। हालत बिगड़ने पर मरीजों को उतरौला या संयुक्त जिला चिकित्सालय जाना पड़ता है। मनकौरा भगवानपुर निवासी राजेश ने बताया कि क्षेत्र में इलाज की कोई सुविधा नहीं है, अस्पताल अधूरा होने के कारण झोलाछाप से इलाज कराते हैं।
दूसरी किस्त हुई जारी, शीघ्र शुरू होगा निर्माण
एमएसडीपी योजना से निर्माणाधीन चार अस्पतालों के लिए बजट की दूसरी किस्त कार्यदायी संस्था को जारी कर दी गई है। कार्यदायी संस्था द्वारा बताया गया है कि शेष भवन के निर्माण का कार्य जल्द पूरा कर दिया जाएगा।
- डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ