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बलरामपुर में दफ्तर खुलते ही हंगामा: कर्मचारियों ने अधिकारी को बनाया बंधक, हाथापाई भी हुई, फिर पुलिस की एंट्री

Thu, 11 Sep 2025 10:02 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर

सार

बलरामपुर के आबकारी विभाग के कंट्रोल रूम में दो मुख्य आरक्षकों ने उपनिरीक्षक नीरज साहू को बंधक बना लिया और मारपीट की। जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें मुक्त कराया। जिला आबकारी अधिकारी ने घटना से अनभिज्ञता जताई। लेकिन यह मामला विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।
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शिकायत दर्ज कराई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला मुख्यालय स्थित आबकारी विभाग में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब दो कर्मचारियों ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारी को कार्यालय के भीतर बंधक बना लिया। इस दौरान हाथापाई तक की नौबत आ गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने अधिकारी को मुक्त कराया। इस सनसनीखेज मामले से विभाग में हड़कंप मच गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उच्च अधिकारी इस गंभीर घटना से अनभिज्ञता जताते नजर आ रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार, रोज़ की तरह बुधवार सुबह आबकारी विभाग के कंट्रोल रूम में कार्यदिवस की शुरुआत हुई। इस दौरान उपनिरीक्षक नीरज साहू और दो मुख्य आरक्षक गिरजा शंकर शुक्ला व धर्मजीत राम शर्मा के बीच तीखी बहस हो गई। मामला इतना बिगड़ा कि दोनों कर्मचारियों ने उपनिरीक्षक से मारपीट करते हुए उन्हें कंट्रोल रूम के अंदर ही बंद कर बंधक बना लिया। किसी तरह उपनिरीक्षक साहू ने बलरामपुर कोतवाली को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला और स्थिति को संभाला।

उपनिरीक्षक नीरज साहू का कहना है कि दोनों मुख्य आरक्षकों को 5 जुलाई 2025 को ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसी बात को लेकर बुधवार को विवाद हुआ और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। साहू ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला आबकारी अधिकारी सत्यनारायण साहू से की है।
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हालांकि, इस मामले में जब जिला आबकारी अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम से अनभिज्ञता जताते हुए कहा, "ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।"

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
एक अधिकारी को कार्यालय में बंधक बनाए जाना अपने आप में बेहद गंभीर और अभूतपूर्व मामला है। इस घटना ने विभागीय अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विभागीय स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, उच्च अधिकारियों की अनभिज्ञता और मौन रवैये को भी गंभीरता से लेते हुए, उनके उत्तरदायित्व की जांच की जानी चाहिए।
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