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Balrampur News: तराई के लोगों के दिलों में आज भी ताजा अटल की यादें

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बलरामपुर। बलरामपुर से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की यादें आज भी तराई के लोगों के दिल में ताजा हैं। आज भी उनके किस्से कहानियों की चर्चा होती है।
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बलरामपुर में पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृतियां संजोने की पहल शुरू हो गई है। निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर का नामकरण उनके नाम पर ही किया गया है। मथुरा बाजार में उनकी प्रतिमा लगाई गई है। भाजपा कार्यालय का नाम भी अटल भवन रखा गया है।
अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोगी रहे 93 वर्षीय लाट बख्श सिंह कहते हैं कि वह वक्त दूसरा था, अब वक्त दूसरा है। अटल जी में अद्भुत आकर्षण था। हर कोई उनका मुरीद हो जाता था। 50 साइकिलों के जत्थे के साथ वह घर-घर जाकर लोगों से वोट मांगते थे। समूचा संसदीय क्षेत्र ही उनका घर था।
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प्रचार करते वक्त जिस गांव में रात हो जाती, वह वहीं ठहर जाते और सुबह होते ही वहीं से फिर चुनाव प्रचार को निकल पड़ते थे। पगडंडी व कच्चे रास्तों पर वह लोगों से मिलते हुए चलते थे।
लाट बख्श बताते हैं कि वर्ष 1957 के चुनाव प्रचार के लिए अटल जी को एक जीप मुहैया कराई गई थी। जीप चलते-चलते बंद हो जाती थी। ऐसे में वह समर्थकों के साथ जीप में धक्का लगाते थे। बैलगाड़ी से भी उन्होंने अपना चुनाव प्रचार किया और यहीं से निर्वाचित होकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे।
1957 के लोकसभा चुनाव में उतरौला तथा रेहरा बाजार की जनसभा में अटल बिहारी वाजपेयी घोड़ी पर सवार होकर प्रचार करने पहुंचे थे। रात में बारिश के कारण कच्चे रास्तों पर जलभराव हो गया था। चालक ने कीचड़ में वाहन ले जाने से मना किया तो वह प्रचार के लिए घोड़ी से निकल पड़े थे।
1957 में पहली बार चुनाव लड़ने बलरामपुर पहुंचे अटल ने नौजवानों की टोली बनाई थी। रमना पार्क में वह कबड्डी खेलते थे। कबड्डी-कबड्डी बोलते दूसरे पाले में पहुंचे अटल को मंगल लोहिया ने पकड़ लिया। तब उन्हें कहना पड़ा कि हार गए, भाई हार गए। हारने के बाद मायूस साथियों से वह कहते थे कि क्यूं मुंह लटकाकर बैठे हो, दोबारा खेलो, अबकी जीत हमारी होगी। वह खगई जाते में रहते थे। उन्हें मुंशियाइन का पेड़ा और काला नमक खूब पसंद था।
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