बलरामपुर। बजट न मिलने से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े सभी तरह के काम बीते चार माह से ठप पड़े हैं। बजट न मिलने से मनरेगा मजदूरों व निर्माण सामग्री के भुगतान का 35 करोड़ अटकने से योजना से जुड़े मजदूर गांवों से पलायन को विवश होने लगे हैं। जबकि सामग्री का भुगतान न हो पाने से सप्लायर भी पंचायत कार्यालय से लेकर ब्लॉक तक के चक्कर काट रहे हैं।
गांवों में श्रमिकों का पलायन रोकने के लिए लागू महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत आवास के समीप ही साल में 100 दिन के कार्य की गारंटी दी गई है। इसके लिए कई विभागों के स्तर पर संचालित कार्य योजना के तहत निर्माण व विकास से जुड़े कार्य कराए जाते हैं। इसके बावजूद बीते चार माह से योजना से जुड़े कार्यों को कराने के लिए शासन स्तर से कोई बजट नहीं मिला है। इससे नए कार्य तो दूर पुराने चल रहे कार्य भी बंद हो गए हैं।
वर्तमान में मनरेगा के तहत जिले में 317 अमृत सरोवर के साथ ही सात आंगनबाड़ी केंद्रों व 37 अन्नपूर्णा मॉडल शाॅप सहित गांवों में नाली-खड़ंजा, चकरोड व अन्य स्वीकृत कार्य कराए जाने हैं। इनमें से कुछ जगह पर शुरू हुआ कार्य भी बजट भुगतान न हो पाने से बीच में ही अटक गया है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी योजना के तहत कार्य करने वाले मनरेगा मजदूरों को बीते नवंबर माह से बकाया भुगतान न मिलने से हो रही है। संवाद
-मनरेगा के तहत नवंबर से मजदूरी व निर्माण सामग्री की खरीद मद में कोई भुगतान नहीं हुआ है। इससे जिले में मनरेगा से जुड़ा करीब 35 करोड़ का भुगतान अटका गया है। इसमें 18 करोड़ श्रमिकों की मजदूरी और बाकी सामग्री के भुगतान का है। भुगतान पाने के लिए मनरेगा मजदूरों से लेकर प्रधान एवं रोजगार सेवक सभी को ब्लाॅक का चक्कर काटना पड़ रहा है।
-मनरेगा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिले के सभी गांवों में 694 रोजगार सेवकों, 48 तकनीकी सहायकों, ब्लाॅक व जिले पर 10 कंप्यूटर ऑपरेटरों, 11 अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों व नौ लेखा सहायकों को तैनात किया गया है। बजट न मिलने से इन्हें जून 2023 से मानदेय का भुगतान भी नहीं हो पाया है। इससे इन्हें परिवार के भरण पोषण में परेशानी उठाना पड़ रही है।
उपायुक्त श्रम रोजगार सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि विभागों के माध्यम से प्रस्ताव लेकर श्रमिकों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन से शीघ्र ही मनरेगा योजना में कार्य करने वाले श्रमिकाें के लिए 150 करोड़ एवं सामग्री के लिए 450 करोड़ का बजट स्टेट नोडल अकाउंट में जारी होना है। इसके मिलते ही मजदूरों व सप्लायर के बैंक खाते में पैसा हस्तांतरित हो जाएगा।